खालीपन

सब कुछ हो कर भी कुछ ना होने का एहसास है, अजब खालीपन है। दिल के अंदर जैसे कोई है ही नहीं। इसके अंदर मानो कुछ अलग ही तूफान चल रहा है। मैं वह नहीं जो सबको दिख रहा है। जो घट रहा है मुझ में वह मैं हूं, जो बढ़ रहा है वह तुम हो। अजब अकेलापन है, सब है, फिर भी खालीपन है। न खुश हूं, न उदास हूं, न चाहत है, न ही शिकायत, न मोहब्बत है और न ही खफा हूं, न जुनून है, न कोई फरियाद बाकी है। शोर सा भरा है, खामोश सा सुनापन है अधूरा सा खालीपन है। ये खालीपन एक ऐसा सन्नाटा है जो बहुत शोर करता है। सब कुछ है मेरी ज़िन्दगी में मगर कुछ तो खालीपन सा है, शायद मुझे वो सपना नहीं मिला अब तक जो मैं खुली आंखों से देखना चाहती हूं। बहुत ज़रूरी है ज़िन्दगी में थोड़ा खालीपन क्योंकि यही वो समय है जहां हमारी मुलाकात हमसे होती है।
ठहर सा जाता है एक खालीपन जो हम भरने की कोशिश करते हैं।
पढ़ सकते हो तो पढ़ लो, आज मैंने अपना खालीपन लिखा है।

प्रिया धामा

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