माँ का समर्पण

उसे निभाती एक स्त्री ।
माँ शब्द अपने में सशक्त,
सबको माफ कर चुप रहती।
सारा दिन दायित्व निभाती,
ताने-बाते सब सह जाती ।
अपने बच्चों के लिए समर्पित,
दुखी-भूखा देख तड़पती ।
बोझा ढोती, मेहनत करती,
बच्चों का हर सुख चाहती ।
कष्ट झेलती,उन्हें दुलारती,
स्नेहिल ममतामयी हृदयी माँ।
हर पल घर का ध्यान रखती,
अपने से पहले बच्चों को रखती।
बच्चों को ठोकर लग जाती,
आँसू माँ की आँखो में भर आते।
हर मुश्किल में सशक्त खड़ी हो,
हल खोजती मेहनत करती।
    ----अनिता शर्मा झाँसी
    -----मौलिक रचना

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