अंजान राहें!!
है अंजान राहें थमती नहीं
नित नये रास्ते मिलते ही जायें।
जीवन डगर पर मुस्कान बिखेरी
बढ़ते चले हैं बाधाओं से टकराकर।
नित नये मुकाम हासिल हुए
अनुभव बहुत जीवन से जुड़े हैं।
अंजान राहें थमती छण भर
हमारी कोशिश पहचान गढ़ रही है।
अंजान राह अब जान पहचान हो गयी है।
जीवन के अंजान सफर में
हर पल उम्र में बढ़ रहे हैं।
कर्म योगी से अंजान राह पर
निर्विकार निर्भय बढ़ रहे हैं।।
अनिता शर्मा झाँसी
मौलिक रचना
Comments
Post a Comment