व्यर्थ

आज फिर तुमने अन्न को डस्टबिन में फेंक दिया कल ब्रेड के टुकड़े फेंके थे कुछ ना कुछ फेंकने की गलत आदत पड़ी हुई है तुम्हें 
रोज रोज अन्न का अपमान क्यूं करती हो क्यूं फेंक देती हो तुम,अनाज पैसों से आते हैं किसी के घर से नहीं।

बालकनी में खड़ी शिखा बालकनी से बाहर की ओर निहार रही थी पर कान अंदर की ओर ही खड़े थे और मुख पर हल्की सी मुस्कान फैली हुई थी सामने हो रहे दृश्य को देखकर।

एक टब में थोड़ा सा बचा चावल और कुछ नम हो रखे बिस्किट के टुकड़े जिससे पप्पियों की मां खा रही थी और उसके नवजात पप्पी अपनी मां का स्तनपान कर रहे थे उछल उछल कर, आखिर उसे अपने बच्चों के दूध के लिए उस बचे हुई भोजन की, मतलब व्यर्थ नाम के भोजन की बड़ी ही जरूरत थी अब कौन देता उसे महंगे हड्डियों के टुकड़े, इंपोर्टेड बिस्कुट या ₹50 किलो वाला दूध जिसे खा पीकर वह अपने बच्चों को हष्ट पुष्ट करती।

कचरो के ढ़ेर से कितने ही जानवर फ्रिज से निकालकर फेंका हुआ सड़ा गला या बासी भोजन कर अपनी भूख मिटाते हैं बचे हुए भोजन का थोड़ा सा बासी हिस्सा कितने काम का होता है किसी के लिए कितना मददगार होता है भूखे के लिए किसी के बिलखते भूख को मिटाने के लिए। भोजन को उचित स्थान पर डालकर उसे व्यर्थ होने से बचाएं ताकि पशुओं का आहार बनकर व्यर्थ ना होकर सदुपयोग का रूप कहलाए पर ध्यान रहे चुभने वाली चीजों के साथ अन्न को मिक्स ना करें ,यह उनके लिए समस्या बन सकती है। 

पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा मनुष्य और पशु पक्षी दोनों ही एक दूसरे पर निर्भर रहते हुए एक दूसरे का हित करते हुए पृथ्वी पर संतुलन बनाए रखते हैं तो जरूर याद रखें व्यर्थ हर बार व्यर्थ नहीं होता है जगह और जरूरत उसे महत्वपूर्ण बना देती है।

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