धरती मां
जग से न्यारी सबसे प्यारी अमूल्य अतुल्य धरती हमारी,
देश का अभिमान है सबकी मां है धरती हमारी शान है।
धरती मां की कोख से जन्मे हम सब हैं इनके बच्चे,
बचपन बीता धरती पर ही।
इसकी रक्षा है कर्तव्य हमारा,
तो क्यों करते हम सब इसको छलनी।
झेले धरती बोझ हमारा,
इसके प्रति कैसे भूले हम धर्म हमारा।
मेरी धरती तेरी धरती कहकर ना बांटो इसे अब ना तुम छांटो इसे।
हर रोज अपने बच्चों को खो रही देखो ये धरती मां है रो रही। हरियाली इस मां की खोती जा रही,
कितनी बंजर ये होती जा रही।
चलो मिलकर करते हैं इसकी पूजा,
यही तो है हमारी धरती माता।।
प्रिया धामा
भिलाई, छत्तीसगढ़
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