डाकिया डाक लाता है

डाकिया हर रोज आता है,
डाक भी साथ लाता है।।


छांव हो या धूप हो।
मंजिल पास हो या दूर हो।।
हो अमीर या गरीब कोई
संदेश घर-घर तक पहुंचाता है...
डाकिया हर रोज आता है,
डाक भी साथ लाता है।


कुछ अपने हमसे बहुत दूर रहते हैं।
फोन पर ही सब अपना हाल कहते हैं।।
मगर पहुंचाना हो कुछ भी
तो डाक से ही भिजवाता है...
डाकिया हर रोज आता है,
डाक भी साथ लाता है।


हम अक्सर कैफे पर जाकर 
अपना रजिस्ट्रेशन करवाते हैं।
कभी आधार, कभी पैन-कार्ड, 
कभी अन्य दस्तावेज भी मंगवाते हैं।।
हो कोई भी कारण देरी नहीं लगाता है,
हमारे सभी काम वह नियत समय पर निपटाता है....
डाकिया हर रोज आता है, 
डाक भी साथ लाता है।


डाक सेवा सरकारी है।
वह सरकारी कर्मचारी है।।
बाकी कर्मचारियों की तरह 
अपनी नौकरी की किसी को 
अकड़ नहीं दिखलाता है...
डाकिया हर रोज आता है,
डाक भी साथ लाता है।


गांव हो या शहर कहीं भी जाने से
डाकिया न सकुचाता है।
सुबह-शाम सबको 
उनकी सूचना पहुंचाता है।।
अपनी ड्यूटी को वह ईमानदारी से निभाता है
इसलिए डाक देने पहले हमारे दस्तखत करवाता है...
डाकिया हर रोज आता है,
डाक भी साथ लाता है।



लेखिका:- रचना राठौर ✍️

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