जो अपमान करे निज माटी का

देश के गद्दारों के ऊपर कुठाराघात करती मेरी यह कविता आप सभी के सामने अवलोकन हेतु प्रस्तुत है l अगर दिल को छू जाए तो आप सभी से असीम प्यार और सहयोग की कामना करता हूं l🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

जो अपमान करे निज माटी का,इंसान नहीं हो सकता हैl
जो गुणगान करें स्व बैरी का,निष्ठावान नहीं हो सकता है l 

 ०१.मेरा चित्त आज व्यथित हुआ है,देश विरोधी नारों सेl
     भारत माँ का शीश झुका ,आज घर में छिपे गद्दारों से l
     जयचंदों से अपने वतन का, सम्मान नहीं हो सकता है 
     जो अपमान करे निज माटी का,.......................l

 ०२.जहांँ गुलिस्तां में गुल धर्म के, रंग बिरंगे खिलते हैंl
       भाषा संस्कृति अलग यहां,फिर भी साथ में चलते हैंl
       नफ़रत की जो करे बुवाई,बागवान नहीं हो सकता है                   
       जो अपमान करे निज माटी का.......................l

 ०३.भारत माँ की जान नहीं हैं,इस रज़ के वो त्रान नहीं हैंl
       पाकिस्तानी नारे ये तो,देशभक्तों की पहचान नहीं हैं l
      माँ कि सुधा से घात करें,वह संतान नहीं हो सकता है 
     जो अपमान करे निज माटी का........................l

 ०४.लाल चौक पे अपने प्यारे झंडे फाड़े जाते हैं l
      भारत माँ के तन पे नुकीले खंजर गाड़े जाते हैं l
      झंडे पे जो आघात कर,निगहबान नहीं हो सकता है
      जो अपमान करे निज माटी का....................l

 ०५. दिल्ली में आस्तीन के सांँप, फन फैलाए बैठे हैं l
       भारत तेरे टुकड़े होंगे,वो सब शोर मचाए बैठे हैंl
       खंडित करे अपना वतन,वीर्यवान नहीं हो सकता है
       जो अपमान करे निज माटी का........................l

०६. कुछ लोगों ने अपने आजाद को,आतंकी बतलाया था 
      भूल के उनके तप त्याग को,पूरे देश को बरगलाया था
      उपेक्षा करे जो बलिदानी का,कुर्बान नहीं हो सकता है
      जो अपमान करे निज माटी का.........................l

०७. कुछ लोगों को असहिष्णुता,आज दिखाई देती है l
       मांँ भारती के लोरी में भी,अब चीख सुनाई देती है l
      जो हुआ न अपने देश का,कामरान नहीं हो सकता है
      जो अपमान करे निज माटी का......................l.

०८.ललकार ये मेरी गद्दारों को,खुल के आओ युद्ध करो l
      अगर हया बाकी है थोड़ी, स्व अंतर्मन को शुद्ध करो l
      मन कलुषित रखने से तो,समाधान नहीं हो सकता हैl
      जो अपमान करे निज माटी का........................ll

१० .सुनो देश के वीर जवानों, चूर इनके अरमान करो l
      पार्थ के सम खुद को आकों,गांडीव से संधान करो l
      लक्ष्य को भेद न पाए जो,चौहान नहीं हो सकता है l
      जो अपमान करे निज माटी का......................l

११. आह्वान करूंँ मैं शासन से, नींद से जाग जाओ अब l
      विषधर केवल गरल उगलते, दूध नहीं पिलाओ अब l
     वो श्वान जो भोंके स्वामी पे,दरबान नहीं हो सकता है l
     जो अपमान करे निज माटी का...…….….….….........l

                   कवि- राहुल सिंह" ओज"
                            नवी मुंबई, 
                    मूल निवास - छपरा ( बिहार)

Comments

Popular posts from this blog

आज की मांग

आखिरी अदालत

सुनहरी यादें