काला कलंक भाग ५
रागिनी जी का आठवां महीना चल रहा था। घनश्याम जी को शहर से बाहर जरूरी काम के लिए जाना पड़ा वह सारी जिम्मेदारी कृष्णा पर छोड़ गए तुम्हें इस स्थिति में इस घर को संभालना रागिनी का भी ध्यान रखना।
कृष्णा ने कहा साहब जी आप निश्चिंत होकर जाए मैं सबका ध्यान रखूंगा आप यहां की बिल्कुल भी चिंता ना करना मैं सब संभाल लूंगा।
घनश्याम जी दो दिन के लिए शहर से बाहर काम से चले गए।
अगले ही दिन रागिनी को लेबर पेन होने लगे ब सबको चिंता हुई ।सब काम कैसे होगा ।लेकिन कृष्णा बिल्कुल नहीं घबराया रागिनी की हालत इतनी खराब थी कि वह वहीं बेहोश हो गई है कृष्णा ने जल्दी से गाड़ी निकलवाई और रागिनी के सामने हाथ जोड़कर कहा मैं आपको अपनी बहन मानता हूं कोशिश तो की थी कि आपके सामने ना आए लेकिन अब मेरी मजबूरी है मैं आपको कुछ नहीं होने दे सकता उसने जल्दी से रागनी जी को गोदी में उठाया और गाड़ी में बैठा दिया।
रागिनी जी को हॉस्पिटल में एडमिट करा कर उसने घनश्याम जी को फोन किया उन्होंने कहा मैं तुरंत आ रहा हूं लेकिन तब तक हूं तुम रागनी का ध्यान रखना।।
वहां हॉस्पिटल में प्रीमेच्योर डिलीवरी के कारण रागिनी जी को ऑपरेशन के लिए बोल दिया और कहा ब्लड का इंतजाम करके रखना ।कोई भी जरूरत पड़ सकती है।
रागिनी को ओ पॉजिटिव ब्लड की जरूरत थी लेकिन उस समय ब्लड बैंक में वह ब्लड ग्रुप नहीं था।
कृष्णा ने फटाफट से अपना ब्लड ग्रुप चेक कराया तो उसका ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव आया वह निश्चित हो गया।
तभी नर्स ने कहा तुम ब्लड देने के लिए तैयार हो जाओ रागिनी जी की हालत खराब है वह तो पहले से ही तैयार था उसने रागिनी जी को ब्लड दिया।
कभी रागनी ने एक सुंदर सी प्यारी गुड़िया को जन्म दिया। गुड़िया स्वस्थ थी।
कृष्णा ने डॉक्टर से पूछा मालकिन जी की तबीयत ठीक है और बच्चे की भी तो उन्होंने उसे आश्वासन दिया सब कुछ सही है।
उसने घनश्याम जी को फोन करके सब बताया उन्होंने कहा मैं रास्ते में ही हूं अभी आ रहा हूं यह खबर सुनकर घनश्याम जी बहुत खुश हुए।
आते ही घनश्याम जी रागिनी के कमरे में गए और देखा बच्चा और मैं दोनों स्वस्थ हैं। डॉक्टर ने बताया यदि कृष्णा नहीं होता तो रागिनी जी की तबीयत बिगड़ सकती थी यह सुनकर रागनी को अपने आप पर शर्मिंदगी महसूस हुई उन्होंने कृष्णा को बुलाकर अपने किए पर शर्म महसूस की।
कृष्णा ने हाथ जोड़कर मालकिन का शुक्रिया अदा किया। आप इस तरह से ना कहिए आप सही है तो मेरे लिए इससे बढ़कर और कोई बात नहीं है मैं साहब जी की बात रख पाया यही मेरे लिए बहुत है
अब उसे अपने बच्चे की चिंता हुई वह जल्दी से घर की तरफ बढ़ा क्योंकि उसने अपना बच्चा औरों के हवाले सौंप कर आया था। अब मोहन को कृष्णा की आदत हो गई थी। उसको देखते ही है खुश हो गया और उसकी गोदी में आने के लिए तड़प आने लगा। जल्दी से कृष्णा ने मोहन को गोदी में लिया और उस शांत किया। मोहन कृष्णा को ऐसे देख रहे थे जैसे कितने दिनों बाद उसको मिला हो।
काफी रात हो चुकी थी और मोहन सोने का नाम नहीं ले रहा था। कृष्णा ने अपनी मीठी आवाज में उसको लोरी सुनाइए इसे सुनते ही मोहन गहरी नींद में सो गया।
कहते हो ना भगवान हर किसी को कुछ ना कुछ विशेषता देते हैं। कृष्णा को भी बहुत मधुर आवाज से नवाजा था। जब वह लोरी गाता था तो सब मंत्रमुग्ध हो जाते थे।
ओ मेरे लल्ला तुझे निंदिया बुलाए।
चांद का पलना तेरा बाबा झुलाएं।
तारों भरी रात है बाबा तेरे साथ है।
दे दे थपकी प्यार भरी।
तेरा बाबा लोरी सुनाए।
मोहन को सुला कर कृष्णा भी सो गया।
रागिनी जी को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल रही थी घनश्याम जी ने कृष्णा से कहा तुम घर में सब तैयारी देख लेना। साहब जी आप जरा भी चिंता ना करें। आपको जैसा चाहिए वैसे ही घर की सजावट होगी।
कृष्णा ने पूरा घर सफेद फूलों से सजाया। रागिनी और बच्ची का अभिनंदन करने के लिए उसने सारी तैयारियां कर दी।
रागिनी जी बच्चे को लेकर बंगले के दरवाजे पर पहुंची तो उनका मन खुशी से भर गया जब इतनी सुंदर सजावट उन्होंने देखी एक तरफ गोदी में सुंदर चंचल मोहिनी खेल रही थी और ऊपर से सफेद फूलों की सजावट मन में सुंदरता भर रही थी।
माना लग रहा था ।आज चांदनी स्वयं धरती पर उतर आई है। और मेरे घर को सुशोभित कर रही है। रागिनी जी ने अपनी गुड़िया का नाम मोहिनी रखा था। चांद की तरह सुंदर थी सफेद चितवन लाल लाल गुलाबी होंठ और गाल।मानो लगता था कोई आसमा की परी उतर आई हो । रागिनी जी कृष्णा की एहसानमंद थी क्योंकि उसकी वजह से मोहिनी का जन्म बिना परेशानी के हो सका।
गुलाबों की पंखुड़ियों की बौछार के साथ रागिनी जी का स्वागत हुआ। लेकिन कृष्णा उनके सामने नहीं आया।
रागिनी जी का मन बेचैन हुआ जिन्होंने जिसने उसकी इतनी मदद की उसी को उन्होंने गलत समझा । उन्होंने कृष्णा को कह बुलवाया।
उन्होंने अपनी गुड़िया मोहिनी को कृष्णा को दिखाते हुए कहा देखो ।इसका रंग तुम पर नहीं गया। लेकिन यह आज से तुम्हारी देखरेख में रहेगी इसकी देखरेख अब तुम्हें ही करनी होगी । रागिनी जी उसके सुंदर ह्रदय को पहचान चुकी थी।
कृष्णा बहुत खुश हो गया और कहां मालकिन आप चिंता ना करो। मैं मोहिनी का ध्यान अच्छे से रखूंगा।। क्रमशः
नीलम गुप्ता
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