ग्रहों की भूल या किस्मत का दोष।।
क्यों किस्मत रूठी हुई है।
जाने क्या बात है,जाने क्या बात है।
प्यार इस कदर है उनसे।
फिर भी ना जाने क्यों जिंदगी रुकी हुई सी है।
जाने क्या बात है, जाने क्या बात है।
सब कुछ अपना अपना सा है।
फिर पराये का सा एहसास हो क्यों पलके झुकी हुई है।
जाने क्या बात है, जाने क्या बात है।
कोई गिला न शिकवा है।
फिर ये ख्बाबो खयालो की दुनिया झूठी हुई है।
जाने क्या बात है, जाने क्या बात है।
उनकी तलब में तड़प जाऊँ।
उनके पास आते ही राहे मेरी मुड़ी हुई है।
जाने क्या बात है ,जाने क्या बात है।
कोई दोष निवारण बता दो मुझे।
असफल हो जाए उपाय ,उनके साए से जिंदगी मेरी जुड़ी हुई है।
जाने क्या बात है, जाने क्या बात है
नीलम गुप्ता (नजरिया) दिल्ली
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