बेटी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।


बेटियाँ हमारी हमारे दिल का टुकड़ा हैं।
दिखती उनमें मां की परछाई।
वह तो मेरा ही मुखड़ा हैं।
हँसते हँसते सारी कायनात 
अपने नाम से महका देती हैं।
सारी जिम्मेदारी चुपचाप उठा लेती हैं।

इनके जन्म के साथ फिर ।
एक सृष्टि की रचियता जन्म लेती हैं।
जो कर अपने को कुर्बान।
फिर नये जीवन को जन्म देती हैं।

कहते है एक औरत ,
औरत के जन्म पर दुखी होती हैं।
वह इसलिए नहीं की एक कन्या जन्मी हैं।
कोई कष्ट उस कन्या को न हो ।
इस बात से थोड़ा विचलित होती हैं।

जब पराया धन कह उसे 
परिवार से दूर जाना पड़ता है।
अपनी संतान को दूर करना।
बड़ा दुर्भर एक मात पिता के लिए होता हैं।

जिस बेटी को पलकों पर पालकर बड़ा करते हैं।
नाज़ नखरे उठाकर उसको प्यार करते हैं।
जब मुश्किल में वह आए ,
दिल मात पिता का रोता हैं।
इसलिए उसके जन्म पर।
मन थोड़ा क्रदन करता हैं।

बेटियाँ मात पिता की जान होती हैं।
अलगाव में जीवन की ह्रास होती हैं।
इनके बिना न जीवन होगा।
न जीवन की उत्पत्ति।
सांसारिक चक्र की संचालन होती हैं।
बेटियाँ केवल एक लड़की नहीं।
पूरे समाज की नीवं होती हैं।

# नीलम गुप्ता (नजरिया) दिल्ली

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