काला कंलक भाग ६
दोनों बच्चे समय के साथ बड़े होने लगे। जब रात को कृष्णा लोरी सुनाता था ।तभी मोहिनी सोती थी उसकी आवाज उसके कमरे तक जाती थी ।जब तक कृष्णा लोरी नहीं सुनाता मोहिनी भी सोती नहीं थी। कृष्णा की आवाज थी ही इतनी मीठी कि सब उसकी लोरी का इंतजार करते थे।
कृष्णा का रंग सांवला होने के बावजूद भी मोहिनी कृष्णा के पास बहुत खुश रहती थी। वह भी बाबा बाबा कहती थी। कृष्णा जी उसकी हर बात का ध्यान रखते थे। मोहन अपने बाबा की हर बात मानता था। और कृष्णा भी मोहन और मोहिनी दोनों बच्चों को अपनी जान से ज्यादा प्यार करता था।
एक तरफ घर की पूरी जिम्मेदारी निभाता। और दूसरी तरफ बच्चों का ध्यान रखते रखते उन्हें प्रेरक कहानियां सुनाता । जिससे उनके चरित्र का निर्माण अच्छी आदतों के साथ हो। बुराइयां उनको छू ना सके। अच्छाई बुराई की पहचान उनको बताता था। और जब बच्चे शैतानी करते हैं तो उनको भूत की कहानियां सुना कर डराता था। और उन्हें समझाता था यदि तुमने गलत कार्य किया तो भूत तुम्हें डराएगा।
धीरे धीरे बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हो गए और दोनों को स्कूल भेजना था उस मोहिनी का एडमिशन उसके पापा ने एक अच्छे प्राइवेट स्कूल में करा दिया था और कृष्णा से भी कहा कि मैं तुम्हें कोटे में उसी स्कूल में मोहन का एडमिशन करा देता हूं ।
लेकिन कृष्णा ने मना कर दिया कि मैं उसे सरकारी स्कूल में ही पढ़ाऊंगा । मेरी औकात जितनी है मोहन को पता रहनी चाहिए यदी वह बड़े स्कूल में अच्छे घर के बच्चों के साथ पड़ेगा तो उसकी आदतें बिगड़ जाएगी ।उसको पैसे का मोल नहीं रहेगा ।फिर वह सबके बीच में अपने आप को अलग-थलग पाएगा । जिससे वह उनसे साथ मिलजुल कर नहीं रहेगा। जिस कारण उसको दिमागी परेशानी होगी। इंसान को हमेशा उतने ही पैर फैलाने चाहिए उतनी उसकी चादर हो।
मोहन पढ़ने में बहुत होशियार था क्लास में हमेशा अच्छे नंबरों से पास होता था । जब तक छोटा था उसके दोस्त उसे चिढ़ाते नहीं थे लेकिन जैसे-जैसे है बड़े होने लगा उसके संग साथी उसे कालू कालू के कर चिढ़ाने लगे इस कारण वह परेशान रहने लगा और पढ़ाई में भी उसका मन नहीं लगता था।
स्कूल के मास्टर ने कृष्णा को बुलाया और उसे कारण पूछा क्या बात है आजकल मोहन का दिमाग पढ़ाई में नहीं लग रहा है कृष्णा को इस बात का पता नहीं था कि वह परेशान रहता है और क्लास में कम नंबर उसके आ रहे हैं। उसने मास्टर जी से कहा मैं उसका ध्यान रखूंगा आगे से आपको शिकायत का मौका नहीं मिलेगा उसने मास्टर जी के हाथ जोड़े और वहां से चला गया।
जब मोहन स्कूल से घर वापस आया तो उसमें मोहन से पूछा बेटा क्या बात है क्या हुआ मुझे अपनी मन की बात बताओ इस तरह से पढ़ाई से मन नहीं चुराना है जो भी तुम्हारे मन में चल रहा है अपनी बाबा से बताओ।
पहले तो मोहन बताने को तैयार नहीं था लेकिन बार-बार कृष्णा के कहने पर उसने बताया उसे क्लास के बच्चे उसे कालू कालू कहकर चिढ़ाते हैं।
कृष्णा को अपने पुराने दिन याद आ गई कि किस प्रकार उसको भी सब कौआ कौआ चिढ़ाते थे। और उसकी पढ़ाई छूट गई। लेकिन उसने ठान लिया कि वह उनके साथ में कुछ भी गलत नहीं होने देगा।
कृष्णा ने मोहन को समझाया देखो हमारे कृष्ण भगवान भी तो सांवले हैं और उन्होंने किस प्रकार अपने मामा कंस का वध करके संसार से बुराइयों का नाश किया।
उसी प्रकार तुम पढ़ लिख कर अपने अंदर इतनी चमक भर लो की यह संसार तुम्हारी चमक के आगे फीका पड़ जाए। फिर कोई तुम्हारा यह सावला रंग नही देखेगा उसकी चमक की चकाचौंध में यह रंग भी चमक उठेगा। जब इंसान ऊपर उठता है तो सब उसकी संता करते हैं अंदर के दो होनी चाहिए फिर कोई तुम्हारी शक्ल और रंग रूप पर ध्यान नहीं देगा हमेशा अपनी नियत अच्छी रखो।
बाबा की बात मोहन के दिलो-दिमाग पर छा गई उसने कहा बाबा आप चिंता मत करो अब आपको कभी शिकायत का मौका नहीं दूंगा अपनी लड़ाई है मैं अपनी लड़ाई स्वयं रहूंगा और आपको जीत कर दिखाऊंगा।
कृष्णा बहुत खुश हुआ और उसको लगा कि मोहन अब समझ गया है अबे कभी पीछे नहीं हटे गा अपना लक्ष्य हासिल करके रहेगा।
जब स्कूल में बच्चों ने फिर से चुराया कृष्णा तो मोहन ने उनसे बात करना छोड़ दिया और कहा मैं तुम को अच्छा नहीं लगता हूं तो मुझसे बात मत किया करो क्योंकि बच्चे उससे अपने होमवर्क में हेल्प लेटे थे उसने कहा मैं जब भी सबकी हेल्प करूंगा जब सब मुझे चिढाएंगे नहीं।
उसकी समझदारी के आगे सब ने उसको गलत बोलना बंद कर दिया और उसकी होशियारी के आगे सब नर मस्तक हो गए। अब मोहन के नए नए दोस्त बनने लगे इसके कारण मोहन बहुत खुश रहता और पढ़ाई भी अच्छे से करता। फिर उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। यह सब उसके बाबा की सीख और प्यार से संभव हुआ।
... क्रमशः
नीलम गुप्ता (नजरिया)दिल्ली
Comments
Post a Comment