कभी चटक जाते हैं रिश्ते शीशे की तरह

कभी चटक जाते हैं रिश्ते शीशे की तरह
बिखर जाते हैं फिर होकर चूर चूर 
कभी बहक जाते हैं शब्द काँटों की तरह
चुभते हैं फिर दिल को जैसे हो शूल
चटके रिश्ते फिर कभी न एक हो पाते हैं
बहके शब्द दिल में घाव बना जाते हैं
रिश्तों और शब्द दोनों को संभाल कर रखना चाहिए....
                       नेहा शर्मा

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