सर्वे भवन्तु सुखिन:
चिकित्सक दिवस पर समस्त चिकित्सकों को समर्पित
मन में समाहित नित सेवाभाव
सर्वे भवन्तु सुखिन: का ही चाव,
सदा कर्म पथ पर अटल अपने
आंखों में पाले निस्वार्थ सपने!!!
देख रहे महामारी की यातनाएं
पर पीड़ा कीअनगिनत विषमताएं,
तड़प रहे लोग अपनों की चाह में
रोते बिलखते परिवारों की भावनाएं !!
जब मचा प्राणों का संकट
रिश्तों में भी पाया टूटने का कंटक,
बेटे मां को ना दे पा रहे कंधा
आपदा में अवसर खोज
कुछ लोग चला रहे अपना धंधा!!!
बढ़ रही तुम्हारी जिम्मेदारियां
नहीं परवाह अपने जीवन की,
परिवार अपना छोड़ कर
सेवा भाव से दे रहे नई ज़िंदगियां!!!
तुम योद्धा इस महा समर के
हौसलों से अपने जीते हैं,
कर रहे नि:स्वार्थ सेवा
आशीष का मिलेगा मेवा !!!!
स्वरचित,, मौलिक,, सर्वाधिकार सुरक्षित
कीर्ति चौरसिया जबलपुर मध्य प्रदेश
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