अनजानी सी प्रेम राही 🌹

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है कोई एक अनजाना सा रही🌹,
जो चल पड़ी है सर्द हवाओं में दिल में मेरे❤️,
जिसके लिए मेरी दिलों❤️ में जान बसती है,
जाती नहीं कभी दूर मेरे सीने से,
ये कहकर हमराही तुम मेरे दिल के शान लगते हो😍।
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है वो एक अनजाना सा राही 🥰,
जिसके लिए मनीष प्रेम की गाथा गाता है,
जो मिल जाओ तो समुंद्र भी तालाब सा लगता है,
दिल में बसाकर जो रखा है उस गुलाब को🌹,
वो परदेशी मेरी रिश्ते में दिल से मेरी जान सी लगती है।
❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️

है वो एक अनजाना सा राही ❣️,
जिसके आंचल मेरे तन को छू गई हो,
जब आयेगी सर्द हवाएं लेकर तुम्हारी आंचल को, 
लगाकर सीने से तुम्हारी यादों की मुहब्बत को,
मुस्कराती होठों से आंखों की गंगा से भींगो देंगे।
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है नहीं वो एक अनजाना सा राही,
जिसकी काल्पनिक चरित्र का चित्रण करता हूं ,
कहा हो किसके प्यार में डूबी हो,
जब होगी असल में दीदार मधु का❣️,
वो अनजानी सी प्रेम राही भी गले की हार सी लगती है।
🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰

आपका हमराही❣️❣️🌹🌹🌹
मनीष कुमार 💘

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