पिकनिक



जिंदगी की इस भागम भाग से दूर कहीं चले जाते है,
चलो थोड़ी देर के लिए पिकनिक मना आते है,
कहीं दूर तुम और मैं सुकून के दो पल बिता आते है,
बच्चों की तरह बचपन जी आते है,
रोज की जद्दोजहद से दूर प्यार के कुछ पल गुजारते है,
चलों दूर एकांत में पिकनिक मना आते है,
कुछ दिनों के लिए अपने आप को तरो ताजा कर आते है,
फिर से संघर्ष से भरी जिंदगी को जीने के लिए चार्ज होकर आते है,
चलों कहीं दूर हम दोनो मिलकर पिकनिक मना आते है।
हरप्रीत कौर
दिल्ली

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