नटखट कान्हा


बंदी गृह में जन्म लिया कान्हा ने,
तोड़ दिए बंदी गृह के बंधन,
देवकी,वासुदेव का नंदन,
चल पड़ा यशोदा और नंद बाबा के गांव के अंदर,
मोर मुकुट सिर पर साजे,
बांसुरी हाथ में मोहत बाजे,
नदिया के तट पर करे शरारत,
गोपियों संग रास लीला रचावत,
कान्हा का बाल रूप है बहुत प्यारा,
जिसे देख हर्षित जग सारा।
घर घर से वो माखन चुराते,
बड़े चाव से उसको खाते,
उनका सुंदर रूप देखकर हर्षित होते नर नारी,
ऐसे है कान्हा मनोहारी,
असुरों को मार गिराया,
कालिया नाग को सबक सिखाया,
एक उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया,
दोस्ती का भी फर्ज निभाया,
गीता का भी पाठ पढ़ाया,
भटके हुए की राह हो तुम,
चारों दिशाओं में कान्हा तुम ही तुम।


हरप्रीत कौर
दिल्ली

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