बाघ सरंक्षण
बाघ हमारा राष्ट्रीय पशु है।1973 में बाघ को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया गया था। बाघ बिल्ली की प्रजाति का जीव है यह एक मांसाहारी जानवर है जो अपने भोजन के लिए अन्य वनजीवो के शिकार पर निर्भर रहता है। हर बाघ के शरीर पर अलग अलग प्रकार की धारियां होती है पर इसका सामान्य रंग काला और हल्का भूरा होता है। कुछ बाघों की प्रजाति अलग होती है तो उनकी धारियों का रंग नीला और सफेद होता है। बाघ का औसतन वजन 100 किलो होता है।बाघ बहुत तीव्र गति से दौड़ता है।ज्यादा वजन होने के कारण ये जल्दी थक जाता है।तभी ये छुप कर अपने शिकार को झट से दबोच लेता है। बाघ अक्सर अकेले और अपनी निश्चित क्षेत्र में रहना पसंद करते है। सफेद बाघ भी होते है पर वो ओडिशा में पाए जाते है। मादा बाघ साढ़े तीन महीने के गर्भ में ही दो या तीन बच्चों को जन्म देती है। बाघ के बच्चें बचपन से ही शिकार करना सीख जाते है।तीन साल तक ये बच्चे अपने माता पिता के साथ रहते है फिर अपनी मर्जी से रहते है।बाघ की आयु कम से कम 19 से 20 वर्ष होती है।बाघ बहुत ही निपुण होते है इनकी निपुणता के कारण ही इन्हें राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिया गया है। अब विश्व में बाघों की जनसंख्या घटती जा रही है।
इसलिए हमे बाघों के संरक्षण के लिए कुछ कड़े नियम और कानून बनाने होंगे ताकि बाघों को सुरक्षित रखा जाए।कुछ लोग चोरी छिपे बाघों का शिकार करते है और मरे हुए बाघों का चमड़ा बाजार में बेचते है इस पर रोक लगानी चाहिए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा सुनाई जानी चाहिए तभी बाघों को बचाया जा सकेगा और जंगलों को काटा न जाए हमें अपने पर्यावरण को बचाना चाहिए तभी हम बाघों की रक्षा कर पाएंगे।
हरप्रीत कौर
दिल्ली
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