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समाज के पिशाच

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आज समाज भरा पड़ा है  जगह जगह पिशाचों से  नही सुरक्षित देश हमारा दरिंदो नर पिशाचों से !! नही कोई बहु बेटी सुरक्षित  आज इस समाज में  गिद्ध बन झपटने को बैठे  पिशाच हैं कबसे ताक में!! मौका पाते लड़की का अस्मत लूट  उसे जीते जी मार देते हैं  फिर खुद खुली हवा में वो निडर हो  बिचरते रहते हैं!! जब देखो लड़की के साथ जबरदस्ती होती है रहती प्रतिदिन एक निर्भया सड़क पर मरती दिखती है रहती लड़की ने अवहेलना की तो तेजाब मुंह पर फेक देते  उसका जीवन बर्बाद कर नेताओं के आड़ में छिप जाते !! ये देश के नेता भी किसी पिशाच से कम नही वो भी देश को लूटने से कभी बाज आते नही! अपने ओहदे का ये भरपूर लाभ उठाते है  नरभक्षी राक्षस ये औरतों बेटियों  को कहां बख्शते हैं!! दहेज लोभी भी सच पूछो तो समाज के पिशाच हैं होते ? दहेज खातिर ये कुछ भी ,करने से कहां चूकते! आए दिन समाज में बहुओं के साथ अत्याचार के किस्से सुनने में आते उनको घुट घुट कर जीने के लिए, ये हैं बाध्य करते !! कई जगह तो पति भी मां बाप के साथ मिला होता  नई नवेली दुल्हन को तिल तिल करके है तड़पाता! शारीरिक म...

मैं कवियत्री हूँ

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मैं कवियत्री हूँ श्रृंगार सजाती हूँ 🌹🌹🌹🌹 सभी रस भाव छंद बंध लिखती हूँ प्रेम के सभी अनुबंध लिखती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ श्रृंगार सजाती हूँ 🌹 मै ही ओज हास्य विभत्स और रस सार लिखती हूँ विश्व व्यापक सर्वोच्च अभिसार लिखती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ अंलकार सजाती हूँ 🌹 मण्डन खण्डन अभिनन्दन में ही रचती हूँ कृष्णा माधव केशव सा चितरंजन रचती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ शिवात्व सजाती हूँ 🌹 दैवित् निमित्त उद्धत  ब्रह्मत्व  बुनती हूँ आकाश निमित्त प्राणो के श्वास बुनती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ संसार  सजाती हूँ 🌹 कोमल समता रमता में ही होती हूँ प्राणो से भी प्रिय प्रिया ममता होती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ मातृत्व सजाती हूँ 🌹 रोली अक्षत दीप मोती ज्योती सी जलती हूँ . बागो की ठण्डी छाव हूँ पलको में सोती  हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ अर्चन सजाती हूँ 🌹 लक्ष्मी दुर्गा काली चन्डी शिव को लिखती हूँ  मन के भीगे अहसासो को सत्य मेव लिखती हूँ हाँ मैं कवियत्री हूँ सौन्दर्य सजाती हूँ 🌹  ईद दीवाली होली कभी  गुरुवाणी सी खिलती हूँ भावो के भीने पोखर में पंकज कभी जलज सी खिलती हूँ हाँ म...

अग्निवीर"(आखिर कब तक)

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             आजादी को 75 साल पूरे होने वाले हैं। सरकार ने कई सपने बुने कुछ पूरे हुए,कुछ अधूरे और कई सपने तो सपने ही रह गए।आख़िर क्यों??? कथनी और करनी सदैव एक सी नहीं होती। जब सरकार युवाहित के भविष्य के लिए कुछ योजनाओं का आगाज करती है तो उसके शुरू होने के पहले ही कहीं कोई छोटी सी चिंगारी, आग भड़काने को तैयार रहती है।एक विनाशकारी ज्वालामुखी की तरह सब तहस-नहस करने के लिए। आखिर कब तक हमारे देश में नवयुवकों को दिग्भ्रमित किया जाएगा। जो जोश व उत्साह अपने मातृभूमि के प्रति समर्पण व अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए होना चाहिए। वही युवावर्ग हिंसात्मक घटना में अपनी पूरी ताकत लगा देते हैं। किसने भड़काया , किसने चिंगारी सुलगाई इन युवाओं के जेहन में????? इन सबसे परे,  सिर्फ़ हमें अब यही सोचना है कि हम सब सर्वप्रथम भारतीय हैं, जो हमारे हित में है, उसे हम सब मिलकर आगे बढ़ायेंगे , व कामयाब होने की कोशिश करेंगे। तू, तेरा और मैं, मेरा से नहीं......... यह संस्कारों, एकता ,सद्भभावों की भारत भूमि है। यहां सिर्फ और सिर्फ "हम और हमारा" ही होना चाहिए। तभी हमारा भा...

अग्निवीर (सैनिक वही जो माने देश सर्वोपरि) (अंतिम भाग)

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(लाइफ स्टोरी ऑफ अलख पांडे)  पांडे अब इतना विश्वसनीय बन चुके थे कि कुछ ही समय में ऐप पर 2 लाख स्टूडेंट आ गए और एप क्रैश हो गई। असंख्य युवा ऐप में एनरॉन कर चुके थे, ऑनलाइन फीस भर चुके थे । इसी बीच पांडे के पास एक ऑफर आया। एक बड़े व्यापारी ने उनकी ऐप का मूल्य  लगाया , मूल्य था 75 करोड़ रुपए । पांडे  चाहते तो उसी समय इतनी धनराशि के मालिक बन सकते थे । लेकिन उन्होंने इस ऑफर को लात मारकर ठुकरा दिया । जैसे कि मैंने शुरुआत में ही कहा कि पांडे का "फिजिक्स वाला" अब 777 करोड़ से ऊपर फंडिंग जुटा चुका है । आज के तारीख में राष्ट्र के सबसे सफल स्टार्टअप में से एक हैं।  आज पांडे रोजगार बांट रहे हैं। फिजिक्स लगभग 19000 लोगों को रोजगार दे रहा है। इनमें टीचर्स, एसोसिएट प्रोफेसर, सब्जेक्ट मैटर, एक्सपर्ट से लेकर टेक्नीशियन आदि शुमार हैं। पांडे अकेले नहीं हैं ,जिन्होंने अपने सपनों का पीछा करते शून्य से  करोड़ों तक का सफर तय किया है। सिर्फ पांडे ही नहीं जो भुखमरी के दौर से उठकर करोड़ों के मालिक बन गए। ऐसे कई उदाहरण हैं । र उन सभी उदाहरणों में एक बात सामान्य है कि उन सभी ने कभी ...

"हे भारत के वीर जवान"

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हे ! भारत के वीर जवान, तुझसे है जिंदा यह हिंदुस्तान पिता तेरा यह खुला आकाश, सरहद की भूमि तेरी मात समान। हे ! भारत के वीर जवान। तेरी रग-रग में बहता लहू दर्प का, ह्रदय तेरा राष्ट्रप्रेम से है भरा, माथे पर चमक रहा सूर्य शौर्य का, भुजाओं में अदम्य साहस है भरा, किन शब्दों से करूं तेरा गुणगान। हे ! भारत के वीर जवान। वंदे मातरम् स्वर के गर्जन से, देश के हर दुश्मन थर्राते, नमन करता उस माटी को माथा, तेरे कदम जहां-जहां तक जाते, तू ही इस मातृभूमि की शान। हे ! भारत के वीर जवान। स्वरचित रचना रंजना लता समस्तीपुर, बिहार

अग्निवीर

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देश की माटी इनका चंदन रक्त प्रवाह इनका नवयौवन रिपु की राह में स्थिर रहते अग्निवीर है यह कहलाते क्या कर लेगा अंधड़ इनका अटल रहे हर झंझावात में देश प्रेम में निशदिन रहते अग्निवीर है यह कहलाते मात पिता का आदर करते भ्रात सखा संग प्रेम भी करते देशप्रेम सर्वोपरि रखते अग्निवीर है ये कहलाते देश भी इनको देता सब कुछ भोजन स्वास्थय सुरक्षित भविष्य आन बान और शान से रहते अग्निवीर है ये कहलाते।                       साधना सिंह                      

समाज के कोढ़ हैं,राक्षस हैं,ये नर पिशाच हैं

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देखो कैसी झेल रहीं हमारी बेटियाँ चारो तरफ है जुल्म। समाज के पिशाचों की बर्बरता औ बुरी नजर का जुल्म। जीवन जीना मुश्किल होगया रस्ता चलना हो गया दूभर। सड़क छाप मजनुओं के मारे जाएं वह कैसे कहाँ किधर। नहीं सुरक्षित जीवन उनका खतरा रहता है आने जाने में। कैसे करें पढ़ाई पूरी अपनी स्कूलों कालेजों में वे जाने पे। मानव भेष में दानवी घृणित सोचों घूरती नजरों से बैचेन। बेटियों को मिलता नहींहै कहीं भी सुख शान्ति और चैन। मानवता की हदें पार कर क्रूरता से इंसानियत हो शर्मिंदा। सभ्य समाज में रहने लायक नहींहैं ऐसे इंसा नहों शर्मिंदा। पहन मुखौटा इंसा के ये राक्षस घूम रहे हैं घर बाहर अंदर। भरी शरारत जेहन में इनके पिशाच बैठाहुआ इनके अंदर। रूप रंग से लगते मानव कृत्य करम दिखते असुरों के जैसे।  मौके की बस तलाश में ही सिरफिरे झपटें नोचें काटें कैसे। मानसिक रूप से बीमार हैं होते यह हैं समाज के पिशाच। दरिन्दगी बहसीपन अमानवीय करम का सरताज पिशाच। निर्भया की पीड़ा भूले भी नहीं लोग मौत की शिकार हुई। हैदराबाद में डॉ. सक्सेना भी दरिन्दों की मौत शिकार हुई। हाथरस में भी घटी घटना है मनीषा पर अत्याचार किया। ऐसे अनजानी कितन...