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बुद्ध की करुणा

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गौतम बुद्ध के एक शिष्य ने उनके पास आकर कहा " भंते अभिवादन एक किसान आपके पास उपदेश सुनने के लिए आया है। " मेरे लिए क्या आदेश है क्या मैं उसे आपके पास भेज दूं? नहीं पहले उससे पाकशाला में ले जाओ उसे भोजन कराओ फिर मेरे पास लेकर आओ। शिष्य किसान को लेकर पाकशाला में गया उसे भोजन करवाया विश्राम करवाया तत्पश्चात बुद्ध ने शिष्य को आदेश जाओ उस किसान को लेकर मेरे पास आओ शिष्य गया किसान को लेकर वापस आया किसान ने बुद्ध के चरणों में बैठ उपदेश सुना और प्रणाम करके अपने घर वापस आया शिशु को बहुत जिज्ञासा हुई और उसने हाथ जोड़कर बुद्ध से प्रश्न किया भंते यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं अपनी जिज्ञासा शांत करना चाहता हूं आपने उस किसान को तुरंत उपदेश क्यों नहीं दिया। बुद्ध ने कहा देखो वह किसान बहुत थका हुआ था और भूखा था ऐसी स्थिति में वह उपदेश ग्रहण करने की स्थिति में नहीं था भोजन करने के बाद विश्राम के पश्चात मानसिक स्थिति ठीक हो गई और मेरा उपदेश वह  अपने हृदय में धारण कर सका तो जब उपदेश देते हैं तो हमें ध्यान रखना चाहिए की दुखी थके उदास और क्रोधित मन में उपदेश नहीं ठहरता है और हमारा उद्देश्य पूर्ण नहीं ह...

"तवायफ"

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"""""""""""" मेरी महफ़िल में आने वाले, मेरी आह पर वाह करते हैं ! मैं रहती हूं बदनाम गली में ,  यहां आकर घर तबाह करते हैं !! मारकर ठोकर जन्नत को ,  दोजख में चले आते हैं ! जो कहते हैं मुझे बाजारू,  वही खुद गुनाह करते हैं  !! मेरी घूंघरू की झंकार पर , चले जाते हैं दिल हार कर ! झूठी कसमें खाते हैं यहां , प्यार बेपनाह करते हैं !! मेरी गली का रास्ता मेरे, घर तक भी जाता नहीं! न जाने कितने अपने ही , मेरी जिंदगी स्याह करते हैं !! ....✍️ पिंकी मिश्रा

मृणाल एक संघर्ष कथा भाग ११

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गतांक से आगे  👇 शहनाईयों की सदा कह रही है ... खुशी की मुबारक घड़ी आ गई है .... सजी सुर्ख़ जोड़े में चाॅंद सी दुल्हन जमीं पे फलक से परी आ गई है ...  हाथों में मेहंदी और चूड़ियां  , पांव में पायल , कानों में झुमके , बालों में गजरा , नाक में नथ , ऑंखो में काजल , माथे पर बिंदी एवं सुर्ख लाल जोड़े में लिपटी मृणाल को देखकर राहुल के कानों में शादी के गाने बजने लगते  हैं ।  जयमाला के लिए  मृणाल को जैसे ही राहुल  के सामने लाया जाता है दोनों की दिल की धड़कनें बेकाबू  होने लगती  है । अपने होने वाले पति को अपलक खुद को निहारते देख मृणाल के ऑंखो की पलकें शर्म से झुक जाती है । अपनी होने वाली पत्नी को शर्माता देख राहुल के होंठों पर शरारत भरी मुस्कान आ जाती है । वह मृणाल से कहता है -  अर्ज   किया     है 👇 " मेरी  दुल्हन शरमाई  और सकुचाई सी  हैं     मैं बेताब और मेरा दिल आफताब सा है "  अर्ज   किया    है 👇 " मेरे अंधेरे जीवन में रोशनी की किरण बने हों आप  अजनबी से ह...

दुनिया एक रहस्यमई

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🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿 कभी लगता हैं खुशियों का मेला हैं कभी लगता हैं दर्द से भरी गमो ने घेरा हैं लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! खो जाते हैं कोई कभी किसी के गहरी यादो में तो सोता हैं बेफिक्र सा चैन की नींद रातो में लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! आँखों में सजते हैं किसीके चाहत के सपने तो कोई किसी के ख़्वाबों से भी डरता हैं  लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! कम नहीं होरही हैं यहाँ किसी के हँसी होठों की तो कोई खामोश हैं यहाँ मुस्कुराना भी सज़ा हो जैसे लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! कुछ पता नहीं चलता यहाँ कब क्या होजाए कभी लगता हैं मिल जाए कोई अपना कभी अपनों से ही दूर भागते हैं लगता हैं दुनिया एक रहस्यमई जगह कोई नैना  यहाँ ना कोई साथ हैं किसीके और नाहीं कोई एकेला हैं.....!! 🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿...

बरसात की वो रात

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गतांक से आगे श्याम अपनी नौकरी के लिए शहर चला गया। बिंदु दिन भर काम करती ,अगर कोई गलती हो जाती तो ,सास ननद डांटने का कोई मौका  नहीं छोड़ती थीं। वो बहुत  दुखी रहती ।उसे  श्याम की बहुत याद आ रही थी । मायके भी नहीं जा सकती थी,वहां सौतेली मां काटने को दौड़ती,यहां तो सास डांटने के अलावा उससे नेह भी रखती थी,आखिर श्याम उसका इकलौता बेटा था। दूसरे गांव  की थी बिंदु ,एक बार अपने रिश्तेदार के घर जो श्याम के गांव में था वहीं आई थी , श्याम की  मां भी वहीं थी उसने बिंदु को वहीं  देखा था,शील गुण तो प्रथम दृष्टया गौण ही होते हैं, पहले व्यक्ति का रूप ही दृष्टिगोचर होता है,बिंदु बहुत ही सुंदर थी , दुधिया रंग ,कजरारे तीखे नयन नक्श ,घने लम्बे बाल,और सबसे अलग एक दम साधारण से वस्त्र पहन वह शादी में आई थी। उसने  विवाह में अपनी बुआ के कहने  पर जो नृत्य किया कि श्याम की मां एकदम लट्टू हो गई। शादी के बाद वह बिंदु की बुआ से मिली,बिंदु की बुआ ने  बिंदु की पूरी कहानी बताई,।   बिंदु की मां बचपन में ही चल बसी थीं। उस समय बिंदु के पिता की उम्र 28 की थी,और बिंदु ...

कहानी आंसुओं की भाग ९

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  फिर अनेकों दिनों तक दुश्यंत का फोन नही आया।। हालांकि सुनंदा की भावी सास और ससुर से रोज बात होती थी। राधा और विशाल दोनों सुनंदा का मन हल्का करते। उसे हौसला देते। सुनंदा भी मन की पीर भूल जाती।    एक दिन सुनंदा के नाम एक पत्र आया। आज के जमाने में पत्र कौन लिखता है। किसी समय तो एक दूसरे को सूचना देने का पत्र बड़ा जरिया था। पर आजकल तो पत्र केवल विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की नियुक्ति पत्र तक सीमित रह गये हैं। वह भी ज्यादातर इंटरनेट से डाउनलोड कर लिये जाते हैं।    सुनंदा ने पत्र खोला। बुझा हुआ चेहरा खिल गया। हालांकि पत्र बहुत बड़ा नहीं था। दुश्यंत ने अपना हालचाल लिखा था। सुनंदा और मम्मी, पापा का हालचाल पूछा था। अपना पता लिखा था। पत्र का अंत एक छोटे से मजाक के साथ किया।   " चलिये। अच्छा है। इस बहाने हम फिर से पत्र लिखना सीख जायेंगे।" सुनंदा को जीने का आधार मिल गया। दुश्यंत के खत पढकर फिर सुनंदा उसका उत्तर लिखती। शुरुआत में तो समझ में ही नहीं आता कि क्या लिखा जाये। धीरे धीरे पत्र लिखने के बहाने दोनों अपने दिलों को अच्छी तरह व्यक्त करने लगे। अक्सर कुछ शेर या कविता...

बाघ संरक्षण

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बाघ संरक्षण  -------------------- बाघ को आरम्भ से ही अन्य जानवरों की तुलना में अपने  राजसी ठाठ -बाट, प्रेरक व निडर स्वभाव के कारण एक विशिष्ट सामाजिक स्थिति प्राप्त है विशेषकर  उसकी लावण्यता, ताकत, फुर्तीलापन और अपार शक्ति होने के कारण ही बाघ को राष्ट्रीय पशु के रूप में गौरंवित किया गया हैं व इसे शीर्ष वनचरों में गिना जाता हैं lइसकी मोटी पिली लोमचर्म का कोर्ट होता हैं जिसपर गहरी धारीदार पट्टीयां होता हैं, जो उसके सुंदरता में चार चाँद लगा देता हैं l जहाँ बाघ में वीरता और देवत्व के भाव होते हैं वहीं बाघों ने भी मनुष्य को सदैव अपनी प्राकृतिक भोजन श्रृंखला से परे एक जीव के तौर पर स्नेह बरसाया हैं lभारत में बाघों की घटती जनसंख्या की जाँच के लिए अप्रेल 1963 में ही बाघ परियोजना शुरू की गई व बाघ संरक्षण के उपाय भी किये गए,सफल भी रहा और अभी भी कार्यरत हैं l हमें देश में बाघों के विलुप्त होने से बचाने के लिए भारत सरकार व पर्यावरण मंत्रालय का पुरजोर सहयोग करना होगा चूँकि यह हमारा प्रथम कर्तव्य हैं, बाघ को एक बड़ा खतरा उसके शरीर के अंगों की मांग है, जिससे बचाना होगा, शिकार करने से रोकन...