मृणाल एक संघर्ष कथा भाग ११
गतांक से आगे 👇
शहनाईयों की सदा कह रही है ... खुशी की मुबारक घड़ी आ गई है .... सजी सुर्ख़ जोड़े में चाॅंद सी दुल्हन जमीं पे फलक से परी आ गई है ...
हाथों में मेहंदी और चूड़ियां , पांव में पायल , कानों में झुमके , बालों में गजरा , नाक में नथ , ऑंखो में काजल , माथे पर बिंदी एवं सुर्ख लाल जोड़े में लिपटी मृणाल को देखकर राहुल के कानों में शादी के गाने बजने लगते हैं ।
जयमाला के लिए मृणाल को जैसे ही राहुल के सामने लाया जाता है दोनों की दिल की धड़कनें बेकाबू होने लगती है । अपने होने वाले पति को अपलक खुद को निहारते देख मृणाल के ऑंखो की पलकें शर्म से झुक जाती है । अपनी होने वाली पत्नी को शर्माता देख राहुल के होंठों पर शरारत भरी मुस्कान आ जाती है । वह मृणाल से कहता है -
अर्ज किया है 👇
" मेरी दुल्हन शरमाई और सकुचाई सी हैं
मैं बेताब और मेरा दिल आफताब सा है "
अर्ज किया है 👇
" मेरे अंधेरे जीवन में रोशनी की किरण बने हों आप
अजनबी से हमदर्द और पति बनने जा रहे हों आप "
मृणाल की हाजिरजवाबी सुनकर राहुल का दिल खुशी से नाचने लगता है । अब मैं आपकी ऑंखो में कभी वह उदासी आने ही नहीं दूंगा जिसे देखकर मेरा दिल बेचैन हुआ था । मैं हमेशा आपको खुश रखूंगा ..... मन में सोचते हुए राहुल ने शरमाती और सकुचाई सी अपनी दुल्हन पर नजर डाली । जयमाला और अंगूठी पहनाई की रस्म अदायगी के बाद अब वह वक्त आता है जिसके सपने हर लड़के - लड़कियां की ऑंखो में अवश्य ही होता हैं ।
शादी ! जी हाॅं शादी एक ऐसा बंधन हैं जिसमें दो विपरीत व्यक्ति तन - मन तथा आत्मा के साथ एक पवित्र रिश्ते के बंधन में बंध जाते हैं । राहुल और मृणाल ने भी आज अग्नि के सामने सात फेरे लिए और सातों जन्म एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा भी किया ।
विदाई ... एक ऐसा शब्द जिसे सुनने और सोचने मात्र से ही हर माॅं - बाप और उनकी बेटियों के कलेजे में हुक सी उठने लगती है और ऑंसूओं की बूंदें पलकों की कोरों को भिंगोनें लगती हैं । मृणाल भी पीछे छोड़ रही थी ऑंसूओं से भींगी अपने छोटे भाई की ऑंखें , अपने पिता का वह घर जिसके लिए आज तक वह जीती रही थी । आज वह इस घर से इस ऑंगन से एक चिड़िया की भांति उड़ने के लिए तैयार खड़ी थी क्योंकि यहाॅं से कहीं दूर .. किसी और जगह पर उसे अपना घरौंदा बनाना था ।
वर - वधू की आरती और उनका स्वागत राहुल की भाभी द्वारा किया जाता है । राहुल की भाभी अपनी देवरानी मृणाल को मुख्यद्वार पर रखें कलश जिसमें चावल और आमपत्र रखें थे की तरफ इशारा कर कहती है कि इसे अपने दाहिने पैर से अंदर की ओर गिरा कर घर में प्रवेश करों और इस तरह अपने साथ सुख - समृद्धि एवं धन - संपति को लेकर इस घर में प्रवेश करों ।
घर के अंदर की रस्में भी भाभी को करता देख राहुल को आश्चर्य होता है और वह अपनी भाभी से पूछता है कि - " माॅं कहाॅं है दिख नहीं रही है ?? "
" माॅंजी के सिर में दर्द हैं इसलिए वह अपने कमरे में आराम कर रही है " भाभी से माॅं के सिर में दर्द सुनकर राहुल रस्म से उठकर जाने को होता है तभी उसकी भाभी उसे मना कर देती है और कहती है कि रस्म से पहले इस जगह से आपको उठने की मनाही है । राहुल अपनी भाभी से मिन्नतें करता है लेकिन उसकी भाभी साफ इंकार कर देती है ।
रस्म समाप्त होते ही राहुल अपनी माॅं के कमरे की ओर तेजी से जाता है जिसे मृणाल समझ नहीं पाती कि ऐसा क्या हुआ है जों राहुल को इतनी तेजी में माॅंजी के कमरे में जाना पड़ा है ??
मृणाल की ऑंखो में छुपे सवाल को राहुल की भाभी समझ जाती है और बातों को संभालते हुए मृणाल से कहती है - " चलों ! अब मुॅंहदिखाई की भी रस्म शुरू करते हैं और इस रस्म में देवर जी की अनुपस्थिति तों जायज़ ही है क्योंकि यह हम औरतों की रस्म है ।
मुॅंहदिखाई की रस्म के बाद भाभी उसे राहुल के कमरे में लेकर जाती है । पूरे कमरे को गेंदें के फूल से सजाया देख मृणाल खुश हों जाती है । मृणाल की ऑंखो में खुशी की चमक देख भाभी कहती हैं -
" मेरी देवरानी जी को गेंदें के फूल पसन्द है तभी तों देवर जी ने इस पूरे कमरें को ही गेंदे के फूलों से सजवाया है " मृणाल ! एक बात कहूंगी बहुत भाग्यशाली हो तुम कि तुम्हें राहुल जैसा जीवनसाथी मिला है जिसे मालुम है कि किसे कैसे खुश करना है ?? अभी भी मेरे देवर जी किसी को खुश करने में ही लगें है लेकिन तुम चिंता मत करना वो जल्दी ही तुम्हारे पास आएंगे ।
भाभी ! क्या मैं एक बार माॅंजी से मिलने जा सकती हूॅं ?? मृणाल के सवाल पर भाभी कुछ सोचने लगी ।
चलों ! मैं तुम्हें माॅंजी के कमरे तक लें चलती हूॅं वैसे भी देवर जी तों वहीं पर है तों वह बात को संभाल ही लेंगे .. कहते हुए भाभी ने मृणाल को अपने पीछे आने को कहा ।
आप यहाॅं पर ?? राहुल ने मृणाल को देखते हुए कहा ।
हाॅं ! मैं माॅंजी को प्रणाम करने आई हूॅं ... मृणाल ने धीरे से कहा ।
राहुल की माॅं बिस्तर पर ही उठकर बैठ गई । मृणाल ने अपनी सास के पैर छुए और उनकी तबीयत अब कैसी है ?? उनकी तरफ देखते हुए पूछा ।
राहुल की माॅं ने मृणाल के पूछे सवाल का जवाब नही दिया । अपने गले में पहनी चेन को उन्होंने उतारा और मृणाल की तरफ बढ़ा दिया जिसे उसने माॅं का आशीर्वाद और नेग समझ कर रख लिया । राहुल की माॅं ने राहुल की तरफ देखते हुए कहा - " बहू को लेकर कमरे में जाओ बेटा और हाॅं ! तुम दोनों थक गए होंगे इसलिए जाकर आराम करों ।
राहुल ने भी जी कहते हुए अपनी माॅं की बातों का अनुसरण किया और मृणाल को लेकर अपने कमरे में आ गया ।
पहले आप फ्रेश हो जाइए तब तक मैं नाश्ते का इंतजाम करता हूॅं ... यह कहते हुए राहुल कमरे से निकल कर बाहर आ जाता है ।
आप तों फ्रेश होने में बहुत समय लगाती है । मैं तों कब से यहाॅं बैठकर आपका ही इंतजार कर रहा था । भूख तों बहुत लगी थी लेकिन पहले दिन ही .. वो भी अपने घर में .. आपसे पहले कैसे खा लेता ? मुस्कुराते हुए राहुल ने कहा ।
बाथरूम में कौन सी चीज कहाॅं पर है यह देखने - सुनने में समय लग गया । आप फ्रेश हो गए ? मृणाल ने राहुल की तरफ देखते हुए कहा ।
मैं तों काॅमन बाथरूम में जाकर जल्दी से फ्रेश हो गया क्योंकि आपके साथ नाश्ता जों करना था मुझे । वैसे आपने मुझे आप क्यूं कहा ?? मुझे उस दिन की तरह तुम ही कहकर बुलाइए मुझे बहुत अच्छा लगेगा .. राहुल ने मृणाल को कुर्सी पर बिठाते हुए कहा ।
मृणाल ने नाश्ता प्लेट्स में लगाई । राहुल ने पहले मृणाल को खिलाया और मृणाल का हाथ थाम खुद ही खाने लगा । दोनों ने एक-दूसरे को खिला कर नाश्ता खत्म किया और आराम करने के लिए बिस्तर पर आ गए ।
अर्ज किया है 👇
" जिनके सपने देखा करते थे
आज वह मेरे इतने करीब है
कभी लगा था कि मेरे नसीब में आप नहीं
आज लग रहा है मेरे नसीब जैसा
किसी और का नसीब नहीं "
राहुल की शायरी सुनकर मृणाल मुस्कुरा कर राहुल के सीने से लग जाती है । राहुल भी मृणाल को ऐसे पकड़ लेता है जैसे वह उससे कभी भी जुदा होना नहीं चाहता ।
क्रमशः
" गुॅंजन कमल " 💓💞💗
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