बरसात की वो रात


गतांक से आगे
श्याम अपनी नौकरी के लिए शहर चला गया।
बिंदु दिन भर काम करती ,अगर कोई गलती हो जाती तो ,सास ननद डांटने का कोई मौका  नहीं छोड़ती थीं।

वो बहुत  दुखी रहती ।उसे  श्याम की बहुत याद आ रही थी ।
मायके भी नहीं जा सकती थी,वहां सौतेली मां काटने को दौड़ती,यहां तो सास डांटने के अलावा उससे नेह भी रखती थी,आखिर श्याम उसका इकलौता बेटा था।

दूसरे गांव  की थी बिंदु ,एक बार अपने रिश्तेदार के घर जो श्याम के गांव में था वहीं आई थी , श्याम की  मां भी वहीं थी उसने बिंदु को वहीं  देखा था,शील गुण तो प्रथम दृष्टया गौण ही होते हैं, पहले व्यक्ति का रूप ही दृष्टिगोचर होता है,बिंदु बहुत ही सुंदर थी , दुधिया रंग ,कजरारे तीखे नयन नक्श ,घने लम्बे बाल,और सबसे अलग एक दम साधारण से वस्त्र पहन वह शादी में आई थी।


उसने  विवाह में अपनी बुआ के कहने  पर जो नृत्य किया कि श्याम की मां एकदम लट्टू हो गई।
शादी के बाद वह बिंदु की बुआ से मिली,बिंदु की बुआ ने  बिंदु की पूरी कहानी बताई,।

  बिंदु की मां बचपन में ही चल बसी थीं। उस समय बिंदु के पिता की उम्र 28 की थी,और बिंदु महज 2साल की थी।बहुत दबाव था ,पिता को दूसरी शादी का ।आखिरकार उन्होंने शादी कर ली,बिंदु की दूसरी मां आ गई ।सलोने चेहरे के पीछे  एक चालाक लोमड़ी का चेहरा छुपा था।

बिंदु के पिता के सामने ,बिंदु के  लिए प्यार का दिखावा करती और बाद में दुत्कारती।बिंदु के पिता को उसके व्यवहार की कोई खबर न थी।
दो साल बाद बिंदु का एक सौतेला भाई भी आ गया।वह जैसे जैसे बड़ी हो रही थी उसकी मां ने उसपर काम का बोझ डालना शुरू कर दिया। बिंदु अपने उपर हो रही ज्यादती को अपनी एक सहेली ज्वाला को बताती थी।ज्वाला के पिता और बिंदु के पिता बचपन के दोस्त थे।

बिंदु की मां नहीं चाहती थी कि वो स्कूल भी जाए ,लेकिन पिता की वजह से उसकी एक न चली।

बिंदु ने हाई स्कूल अच्छे नंबरों से पास कर लिया।
एक दिन  बिंदु की सौतेली मां किसी बात को लेकर बिंदु को मार रही थी ,उसी समय बिंदु के पिता पहुंच गए,उन्होंने बिंदु को मारते देखा , उस दिन उनका मन ग्लानि से भर गया, वे सीधे घर से निकल ज्वाला के पिता  के पास चले गए ,अपने दिल में लगी चोट का मलहम लगाने ,वहां ज्वाला के पिता ने बताया ये आज का अत्याचार नहीं है ,तुम्हारी पत्नी का बिंदु पर, वो तो बचपन से ही उसके साथ कभी अच्छा व्यवहार नहीं करती थी।

ये बातें बिंदु के पिता सह नहीं पाए और उन्हें दिल का दौरा पड़ा,जब तक उनको हॉस्पिटल ले जाया जाता ,उनकी इहलीला समाप्त हो गई।
ये थी कहानी बिंदु के अभागेपन की , बुआ ने श्याम की मां को बताया।

बिन बाप की बेटी को श्याम की मां  ने पसंद कर लिया,और श्याम को परदेश से विवाह के लिए बुला लिया।

श्याम को भी बिंदू बहुत पसंद थी,वह उसके साथ अधिक समय बिताना चाहता था,लेकिन उसे छुट्टी बहुत कम ही मिलती थी।
मालवाहक जहाज में सामान लादने का काम करता था।उसकी मां उसे हमेशा नौकरी छोड़ने को कहती ,लेकिन उसे उसमे बहुत मजा आता था।उसे काफी माल भी कभी कभी मिल जाता था।कोई अगर सामान का मालिक न आए ,या क्लेम करता तो वे सब मिलकर सामान बांट लेते थे।

और उसे बेचकर मुनाफा कमाते।

तीन महीने मुश्किल से बीते होंगे,श्याम घर आ गया।

सबके लिए   श्याम  शहर से उपहार  लेकर आया  था। मां और बहन  की  आश्चर्य से  आंखें गोल-गोल हो रही थी उन्होंने कहा अरे बेटा बड़ा जल्दी आ गए।
श्याम ने कहा _हां मां  तुम लोग अकेली रहती हो ना यहीं  कोई कारोबार  या खेती कर लूंगा अब  शहर की नौकरी नहीं करूंगा ठीक है।

बिंदु उसे  देखकर बहुत ही खुश हुई वह बिंदु के लिए भी बहुत सारा उपहार  लेकर आया था।महंगा परफ्यूम,खूबसूरत साड़ियां,नाइट गाऊन।

क्रमशः

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