बुद्ध की करुणा


गौतम बुद्ध के एक शिष्य ने उनके पास आकर कहा
" भंते अभिवादन एक किसान आपके पास उपदेश सुनने के लिए आया है। "
मेरे लिए क्या आदेश है क्या मैं उसे आपके पास भेज दूं?
नहीं पहले उससे पाकशाला में ले जाओ उसे भोजन कराओ फिर मेरे पास लेकर आओ।
शिष्य किसान को लेकर पाकशाला में गया उसे भोजन करवाया विश्राम करवाया तत्पश्चात बुद्ध ने शिष्य को आदेश जाओ उस किसान को लेकर मेरे पास आओ शिष्य गया किसान को लेकर वापस आया किसान ने बुद्ध के चरणों में बैठ उपदेश सुना और प्रणाम करके अपने घर वापस आया शिशु को बहुत जिज्ञासा हुई और उसने हाथ जोड़कर बुद्ध से प्रश्न किया
भंते यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं अपनी जिज्ञासा शांत करना चाहता हूं आपने उस किसान को तुरंत उपदेश क्यों नहीं दिया।
बुद्ध ने कहा देखो वह किसान बहुत थका हुआ था और भूखा था ऐसी स्थिति में वह उपदेश ग्रहण करने की स्थिति में नहीं था भोजन करने के बाद विश्राम के पश्चात मानसिक स्थिति ठीक हो गई और मेरा उपदेश वह  अपने हृदय में धारण कर सका तो जब उपदेश देते हैं तो हमें ध्यान रखना चाहिए की दुखी थके उदास और क्रोधित मन में उपदेश नहीं ठहरता है और हमारा उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पाता है।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित अप्रसारित सर्वाधिकार युक्त डाक्टर आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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