"तवायफ"

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मेरी महफ़िल में आने वाले,
मेरी आह पर वाह करते हैं !
मैं रहती हूं बदनाम गली में , 
यहां आकर घर तबाह करते हैं !!

मारकर ठोकर जन्नत को , 
दोजख में चले आते हैं !
जो कहते हैं मुझे बाजारू, 
वही खुद गुनाह करते हैं  !!

मेरी घूंघरू की झंकार पर ,
चले जाते हैं दिल हार कर !
झूठी कसमें खाते हैं यहां ,
प्यार बेपनाह करते हैं !!

मेरी गली का रास्ता मेरे,
घर तक भी जाता नहीं!
न जाने कितने अपने ही ,
मेरी जिंदगी स्याह करते हैं !!

....✍️ पिंकी मिश्रा

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