Posts

किस्मत की किताब

Image
न जाने कितने ही पन्नों की होती है,  ये किस्मत की किताब,  इसमें ही छुपा होता है,  हमारी जिंदगी का हिसाब| आज यही बैठी हुई सोच रही थी,  कि क्या खोया और क्या पाया| फिर मैंने देखा कि....  कुछ पन्ने फट गये थे,  कुछ पीले पड़ गए थे| कुछ पन्नों की स्याही फीकी पड़ गयी थी,  और कुछ पन्नों पर धूल चिपक गयी थी।  मगर कुछ पन्नों में ऐसी बात न थी..!!  उनको पढ़ने का वक्त ही मिला...!  और जिनकी मुझे याद भी न थी...!  कुछ पन्नें अपने से लगते थे!  और कुछ बेगाने से| कुछ पन्नों के अंदर मिली थी...  गुलाब की पंखुड़ियाँ...  जो किसी की याद दिला रहीं थीं| जिसको देखकर होठों पर आ रही थी मुस्कुराहट| और कुछ पन्नों में रक्खे हुए थे...  मोर के पंख जिसे देख सहेलियों की आ रही थी याद और हसीं भी,,  क्योंकि याद आ रहा था कि कैसे लड़ाई करते थे हम मोर के पंख के लिए कि जल्दी से हमारे हाथों में आ जाए ये पंख,,  जिसे देख याद आ रहा था बचपन का जमाना| सजावट से ही सबकी किताबें रंगीन बनती थी....!  और मनचाहे रंगों से ही तकदीर बनती थी....!!...

यह अकेलापन

Image
कितने शिकवे कितनी  शिकायते दिल मेरा करता है, जब कभी भी अकेलापन उसे खलता है।   तुमसे दूर जाना इसको  एक गुनाह सा लगता है,   हालात के आगे बेबस होकर गुनाह यह करता है। कोई मौसम , कोई  मयकश इसे तसल्ली नही देता, जब यह बेजार होकर तेरी चाहत में तड़पता है। वो सुकून वो मोहब्बत न पा सका जमाने में, जो अपनापन मेरे महबूब तुझसे मिलता है। कितनी यादे आज भी बिखरी हैं उस मोड़पर, जब भी गुजरे चलते कदमों में  एक गुबार उलझता है। कमी नही इस जहाँ मे चाहने बालों की अंजुम, पर दिल को कौन समझाए उसे न कोई जचता है। मिल जाती है बेहत्तर शक्लो सूरत  उनसे, पर वो अपनाइयत से भरा  दिल नही मिलता है। बहुत  उकसाते है दिल को यह काफिर नजारे, कहते बन जाओ हमारे, पर कुछ पल को ही सब भाताहै। अंजू दीक्षित, बदायूँ, उत्तर प्रदेश

कली का भाग्य

Image
हर कली फूल नही बनती कभी गजरे कभी माला कभी वेलेंटाइन की गिफ्ट कभी गजलों ओर नगमों तो कभी तवायफ की अदा   इन बाजारों तक ही सीमित  हर कलीचाहती है फूल बनू महकू खुशबू बिखरा उ देवो के सर चढू भाग्य पर इतराओ  पर क्या कोई बता पाया खोल पाया कली का भाग्य संध्या पंवार राजस्थान

कृपा की बारिश

Image
रक्त से लथपथ है धरा आपकी हे केशव यहाँ लाशों पर लाशें पट रही है, देख कर यह दुख भरा दृश्य महाभारत की याद आ रही है।  जहाँ अनेको अधर्मी राजाओं के साथ अभिमन्यु जैसे योद्धाकी बलि चढ़ रही थी, और सौ पुत्रों का माँ गांधारी की गोदी सूनी हो रही थी। आज धरती पर अनेकों गांधारी बिन पुत्रों के रो रही है, और अनेकों उत्तराओं की मांग सूनी हो रही है। हालात है सबकी कुंती जैसी जो एक पुत्र की विजय और दूसरे की मौत का मातम मना रही है, कर दो अपनी कृपा के रंगों की बारिस हे माधव क्योंकि आज तेरी धरती तुझसे फरियाद कर रही है। शीला द्विवेदी "अक्षरा"

अकेलापन

Image
ख्वाब, ख्वाहिशें, मुहब्बत,  क्या करूँ लेकर!  अकेलेपन में...!  बेजार सी जिंदगी,  बे रौनक सा दिल...!  रेजा- रेजा बिखरते,  तन्हाई में...!!  कश्मकश की चादर,  लपेटे तसव्वुर में...!  महज कोरे सफ़हे,  जिंदगी के...!  हालात बयाँ करती,  एक रूहानी मौजें,  वफा की...!!     श्वेता कर्ण

सेवा

Image
     रख लो सेवा भाव,      मन तेरा खुश रहेगा        मन तेरा खुश रहेगा ।       बनेंगे बिगड़े काम        रख लो सेवा भाव        मन तेरा खुश रहेगा।       दया धर्म हृदय में रख लो        दीन दुखी की सेवा कर लो         कर लो कुछ उपकार         मन तेरा खुश रहेगा ।        जैसी सेवा बने तुम कर दो         तन से मन से या फिर धन          से दुआ मिले भरपूर           मन तेरा खुश रहेगा ।         संतों की करना सेवकाई         गरीब से ना करना बेवफाई           मिल बांट कर के तू खा ले           सब मेरी जान है भाई          मन तेरा खुश रहेगा।          मन तेरा खुश रहेगा। ...

जरुरतमंदो की सहायता का फल

Image
भोला  आज मै नही जा सकता काम पे क्यों बाबा ! मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है  ,रात का कूछ बचा हैं  तो तू खा ले ,चार रोटियां बची थी तो दो उसने खाई और दो अपने बाबा को दिया। अगली सुबह .................आज भी मुझे ठीक नहीं लग रहा है,भोला मेरे तो हाथ पैर भी कांप रहे है ,तुम आराम करो बाबा मै जाता हू आज लकड़ी काट कर बाजार मे जाकर बेच के आउगा,पर बेटा तू जंगल में नही जा पाएगा ,और तुझे तो कूछ समझ मे भी नही आएगा । पर भोला नही माना वो निकल गया ,वो जंगल की और धीरे धीरे बढ़ रहा था ,वो पहुच गया । ह वो पेड़ अच्छा है उसे ही काटता हू,पर वो जैसे ही काटने पहुच उसे किसी की आवाज सुनाई दी भोला ने देखा तो एक बूढ़ा आदमी गिरा हुआ था वो दौड़ गया उस बूढ़े आदमी को उठाया ,और पानी के लिये नजर दौडाई और उस आदमी को बोला आप यहा बैठो मै पानी ले के आता हू ,थोड़ी दुर पे जाने के बाद ही उसे एक झरना दिखा  अब उसने नजर दौडाई की कुछ पानी ले जाने के लिये मिलता तो उसे एक मटका का टूटा हुआ हिस्सा दिखा ,पानी ला के उस बूढ़े आदमी को दिया और चल दीया ,पर वो कूछ लकड़ीया काट के आगे बढ़ा तो उसे एक खरगोश दिखा जिस पर बाज हमला...