सेवा
रख लो सेवा भाव,
मन तेरा खुश रहेगा
मन तेरा खुश रहेगा ।
बनेंगे बिगड़े काम
रख लो सेवा भाव
मन तेरा खुश रहेगा।
दया धर्म हृदय में रख लो
दीन दुखी की सेवा कर लो
कर लो कुछ उपकार
मन तेरा खुश रहेगा ।
जैसी सेवा बने तुम कर दो
तन से मन से या फिर धन
से दुआ मिले भरपूर
मन तेरा खुश रहेगा ।
संतों की करना सेवकाई
गरीब से ना करना बेवफाई
मिल बांट कर के तू खा ले
सब मेरी जान है भाई
मन तेरा खुश रहेगा।
मन तेरा खुश रहेगा।
अगर तेरे पास है ज्यादा
उसमें से तू बात दे थोड़ा
एक चेहरे पर मुस्कान तू लेआ
मन तेरा खुश रहेगा
मन तेरा खुश रहेगा ।
ना मैं मंदिर में रहता हूं
ना मैं मस्जिद में रहता हूं
किसी दुखियारे की कर लो सेवा
मैं तो वही रहता हूं
मन तेरा खुश रहेगा।।
दिल की कलम से
मधु अरोड़ा
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