कृपा की बारिश


रक्त से लथपथ है धरा आपकी हे केशव यहाँ लाशों पर लाशें पट रही है,
देख कर यह दुख भरा दृश्य महाभारत की याद आ रही है। 

जहाँ अनेको अधर्मी राजाओं के साथ अभिमन्यु जैसे योद्धाकी बलि चढ़ रही थी,
और सौ पुत्रों का माँ गांधारी की गोदी सूनी हो रही थी।

आज धरती पर अनेकों गांधारी बिन पुत्रों के रो रही है,
और अनेकों उत्तराओं की मांग सूनी हो रही है।

हालात है सबकी कुंती जैसी जो एक पुत्र की विजय और दूसरे की मौत का मातम मना रही है,

कर दो अपनी कृपा के रंगों की बारिस हे माधव
क्योंकि आज तेरी धरती तुझसे फरियाद कर रही है।


शीला द्विवेदी "अक्षरा"

Comments

Popular posts from this blog

आज की मांग

उम्मीदें

एक कप चाय