जरुरतमंदो की सहायता का फल
भोला आज मै नही जा सकता काम पे क्यों बाबा !
मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है ,रात का कूछ बचा हैं तो तू खा ले ,चार रोटियां बची थी तो दो उसने खाई और दो अपने बाबा को दिया।
अगली सुबह .................आज भी मुझे ठीक नहीं लग रहा है,भोला मेरे तो हाथ पैर भी कांप रहे है ,तुम आराम करो बाबा मै जाता हू आज लकड़ी काट कर बाजार मे जाकर बेच के आउगा,पर बेटा तू जंगल में नही जा पाएगा ,और तुझे तो कूछ समझ मे भी नही आएगा ।
पर भोला नही माना वो निकल गया ,वो जंगल की और धीरे धीरे बढ़ रहा था ,वो पहुच गया ।
ह वो पेड़ अच्छा है उसे ही काटता हू,पर वो जैसे ही काटने पहुच उसे किसी की आवाज सुनाई दी भोला ने देखा तो एक बूढ़ा आदमी गिरा हुआ था वो दौड़ गया उस बूढ़े आदमी को उठाया ,और पानी के लिये नजर दौडाई और उस आदमी को बोला आप यहा बैठो मै पानी ले के आता हू ,थोड़ी दुर पे जाने के बाद ही उसे एक झरना दिखा अब उसने नजर दौडाई की कुछ पानी ले जाने के लिये मिलता तो उसे एक मटका का टूटा हुआ हिस्सा दिखा ,पानी ला के उस बूढ़े आदमी को दिया और चल दीया ,पर वो कूछ लकड़ीया काट के आगे बढ़ा तो उसे एक खरगोश दिखा जिस पर बाज हमला कर रहा था ,भोला ने बाज़ को बड़ी मुश्कील से भगाया ,खरगोंश को बचाया ।
अंधेरा होने लगा भोला घर की ओर जाने लगा ।
बाबा आज तो मुझसे कूछ नही हुआ हमे भूखे पेट ही सोना पड़ेगा और उसने आज की सारी घटना बता दी ,जाने दे बेटा दूसरों की मदद करनी चाहिए ।
आज नगर के राजा के यहा भोज था तो हमे सैनिको ने खाना दे दिया है भूखेपेट नही सोना है ।
भोला ने बड़े ही चाव से स्वादिष्ट भोजन खाया ,दोनो ने खाना खाया और सो गए ।अगले दिन भोला फिर जंगल मे लकड़ीया लाने गया ,उस दिन भी उसे वही अदमी,और खरगोश मिले उस दिन भी भोला ने उनकी सेवा की ,ऐसा सात दिन तक चला। सातवें दिन उस बूढ़े आदमी ने उसे एक सोने की लकड़ी दी और कहा बालक तुम ये ले लो ,और एक लकड़ी तोड़ कर उसपे रख देना तो बहुत सारी लकड़ीया हो जाएगी जिससे तुम्हारा काम हो जाएगा ,बस तुम लालच मत करना और सबकी सहायता करना।
भोला पर मैं ये सोने की लकड़ी नहीं ले सकता ,मेरे बाबा कहते हैं की जो वस्तु अपनी नही है उसे हमें नही लेना चाहिए,तब उस बूढ़े आदमी ने अपना असली रुप दिखाया और बोला की मै एक देव दूत हू और तूम्हारी निस्वार्थ सेवा से मै प्रसन्न हू,तुम ये ले के जाओ ,भोला खुश होता है और वो सोने की लकड़ी ले लता है और देवदूत को नमस्कार कर के चला जाता है।
बाबा देखो मुझे क्या मिला हैं,और सब कूछ अपने बाबा को बता देता है ,और जैसा उस देवदूत ने कहा था वैसा ही दोंनो करते थे अब उन दोनो को कोई कमी नही होती थी और जरूरतमंदों की सहायता भी करते थे और खुशी खुशी अपना जीवन यापन करने लगे।
नोट ----जो दर्द मे हैं उसकी हमेशा सहायता करनी चाहिए ।
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