धूम्रपान निषेध दिवस पर



 


आग का दरिया बचो
लत बूरी इंसा बचो
सिंधु यह दुख भरा
डूब मत जाइये

व्याधि मूल मानो इसे
भारी भूल जानो इसे
अवगुण की खान को 
मन से हटाइये

आये मूर्छा फुले सांस 
तन मन का हो नाश
जड़ विनाश की यह
खुद को बचाइए

नाना यह बीमारी दे 
दौलत छीन सारी ले
खुशियों के चंद पल
सुख से बिताइये


बीड़ी पान मसाला या
गुटका वाला हो शौक
लत बुरी होती है ये
कभी न लगाइए

धुआं धुआं कर देती
जिंदगी को पल में ही
धूम्रपान की आदत
गले न लगाइए

कहते है सब जन
धूम्रपान अभिशाप
रोग का ठिकाना तन
कभी न बनाइए

केंसर टीबी का रोग
कोरोना का भी संजोग
जहरीला नाग है ये
सबको बताइए

रमाकांत सोनी नवलगढ़

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