Posts

तुम लौट आना

Image
भूली हो इन गलियों को !! याद आ जाए तो एक बार आ जाना,, हम ठहरें है उन्हीं पलों में,,तेरे लौट आने की खातिर हो सके तो लौट आना,, नमक सी दारुण हो गई जिंदगी हो सके तो  चुटकी  भर थोड़ा  सा आटा ले आना,, ये भी न हो सके मुमकिन तो कुछ पलों के लिए ही सही तुम लौट आना,, हम आज भी उन्हीं  यादों में बैठे है तुम आते वक्त यादों का पिटारा ले आना,, ए मेरें हमरूह तुम लौट आना,, अब मुमकिन नहीं तेरे बगैर सांस लेना भी, तुम अपनी आहट ले आना,, निवेदन करते है आते वक्त थोड़ी लबों पर मुस्कराहट  ले आना,,ये  सब  हो  या ना हो तुम लौट आना ।।                                    ® "कुमार"

तेरे बिना हम

Image
आजतक नहीं मिटा पाये हम तेरी यादो को  नहीं दिल से निकाल पाये सनम तेरी अहसासों को  कब समझोगी प्यार को मेरी कैसे अहसास दिलाऊ बता  की तेरे बिना हम कतरा कतरा करके मरते जारहे है   मेरी दिन का सुकून रातो को करार लेगयी तुम गयीं तो अपने साथ क्यों न अपनी यादें भी लेगयी आज भी देख रहा हूँ राहें तुम्हारे लौ आने की ज़िन्दगी में की तेरे बिना हम कतरा कतरा करके मरते जारहे है  क्यों गयीं तुम दूर मुझसे एक वजह तो बता देती क्यों रूठगयी मुझसे कमसेकम वो मेरा खता बता देती समझा लेता दिल को गर नहीं था प्यार की काबिल तेरा की तेरे बिना हम कतरा कतरा करके मरते जारहे है  दिखती है हर जगह आँखों में बस तुम्हारी ही सूरत आजाओ अब जान मेरी तू है मेरी साँसो की जरुरत पल पल बितता जारहा है मेरा सदियों सी ज़िन्दगी क्योकि तेरे बिना हम कतरा कतरा करके मरते जारहे है  मैं हूँ आवारा दिल पर बस तेरे प्यार का ही मारा हूँ कसम मेरे साँसो की है सनम  मेरी मैं अब भी बस तुम्हारा हूँ कब महसूस करोगी दिलबर मेरी अपने प्रीतम की चाहत को जो तेरे बिना हम कतरा कतरा करके मरते जारहे है स्वरचित ✍️✍️✍️✍️प्...

जीवन धारा यूं बहने दो

Image
          ++++      प्रतिकूल परिस्थितियों में भी  जीवन धारा यूं बहने दो ।            मन अनुसार न होगा हरदम  उतार चढ़ाव जरा सहने दो ।       थाम दी जाती है बांधो से शक्ति उफनती नदी की भी,          सो आवेश हृदय के अपने हृदय में संयम से रहने दो।।                                  +++++ सोलह कलाओं से युक्त जो चंद्रमा सदियों से प्यारा है । बादल की ओट में क्या कभी  हमें लगता वो बेचारा है ? क्षणिक दुःख के आगमन को तुम  विपत्ति कभी न अपनी बनाओ, अपने व्यक्तित्व की आभा को  इस पूरे अम्बर को गहने दो ।। प्रतिकूल परिस्थितियों में भी  जीवन धारा यूं बहने दो।।            +++++ पंक के दूषित परिवेश में  भला पंकज कभी मैला है? महत्व नहीं क्या उस सर्प का जो स्वभाव संग विषैला है? सुख दुख तो जीवन में अपने  जीने हेतु चालक यंत्र हैं, जो ...

ओस की बून्दें

Image
बारिश की ये नहीं बून्दें थीं सजी थीं ओस कणिकाएं कोमल दूब की नोकों पर  वृक्षों की नुकीली कोंपलों पर  बिछी हो जैसे मोतियों की चादर सज गई प्रकृति ओढ़े ठंडी चादर ये बारिश नहीं ओस की बून्दें थीं  बारिश सौंप गई थी  ओस को कुछ कार्यभार कर ले  तू भी प्रकृति की थोड़ी सी साज सम्भाल कुम्हलाये न कोई दूब कोई फूल पड़ने न पाये उन पर  धूल रोज आना उन्हें धीरे से सहला जाना  कुम्हलाने न पायें वे कभी उन्हें तेज  धूप से रोज बचाना रेनु सिंह

🤗करले ख़ुद से प्यार तू वंदे🤗

Image
मत चाहो किसी को इतना कि उसे ख़ुद पर गुरुर हो जाये  फिर राह तको तुम उसकी और वो तुमसे दूर हो जाये!! इंतज़ार करते -2 तुम थक जाओ उसका  लेकिन उसको तुम पर तरस न आये!!  करले वंदे तू खुद से प्यार इतना कि दिल न कोई तेरा तोड़ पाए चाहत बन जा तू ख़ुद की ही की मन ही मन तू सबको भाए!! कर निर्धारित एक लक्ष्य को जिससे तेरा भविष्य बन जाए मत सोना तू चैन की नींद जब तक तुझे वो लक्ष्य हांसिल न जाए!! मत पड़ इस दुनियादारी के मोह-मायाजाल में जिससे तू सिर्फ दुःख को पाए जो तेरा है वो कहीं नही जाएगा और जो तेरा नही वो तुझे कहाँ से मिल जाये!!  कर्म का हिसाब सबको चुकाना पड़ता है यहाँ जो जैसा बोयेगा वो वैसा ही तो पाये!! पुण्य की गठरी बांध लें वंदे साथ तेरे बस वो ही जाये!! मेरा-तेरा छोड़ यहीं पे इस धरा का सब यहीं धरा पर रह जाये!! करले ख़ुद से प्यार तू वंदे कि तू सबके मनको भाए अगले जनम तू क्या बने ये कौन जान पाए!!             एकता श्रीवास्तव ✍️

एक टुकड़ा धूप का भाग १५

Image
गतांक से आगे संयोगिता अपने बचपन की यादों में खोई हुई थी कि तभी किसी औरत के जोर जोर से चिल्लाने की आवाज़ आने लगी। आज सिस्टर मारिया अपनी बेटी मिशेल से मिलने गई थी क्योंकि आज उसका जन्मदिन था। संयोगिता  अपने कमरे से बाहर निकल कर बरामदे में आ गई। वहां उसने देखा कि एक स्त्री बदहवास हालत में चीख रही है, चिल्ला रही है। और एक आदमी उसे संभालने की पूरी कोशिश कर रहा है। लेकिन वो औरत उसके काबू में नहीं आ रही है। उसका पहनावा और हालत किसी की भी आंखों में आंसू ला सकते थे।22 -23 साल की उम्र में सफेद साड़ी में लिपटी हुई दुबली पतली सी लड़की जिसके माथे पर अभी भी बिंदी की हल्का सा निशान बना हुआ था। श्रृंगार विहीन उदास चेहरा, लगातार रोने से सूजी हुई बड़ी बड़ी आंखें ,  कमर तक लंबे लेकिन उलझे हुए बाल, चूड़ियों से खाली कलाइयां , जिसमें टूटी हुई चूड़ियों के टुकड़ों से जख्म बन गए थे।खूबसूरत मुलायम नाजुक से पांव जिसमें बिछिया  पहनने से बने  निशान उसकी वर्तमान स्थिति पर रो रहे थे। जो पैर एक छोटा सा कंकड़ भी बर्दाश्त नहीं कर पाए उन पैरों में चप्पलें भी नहीं थी ।नंगे पांव वो आश्रम  मे...

अपराधबोध भाग १

Image
रोज की किचकिच से मैं तो तंग आ चुकी हूं। पता नहीं मेरे भाग्य फूटे थे ,जो इस घर में आई। कपड़े फैलते हुई अंजली बड़बड़ा रही थी । रविवार का दिन था,समीर भी घर में था ,दो बच्चे ,आस्था,और कुणाल टीवी पर लगे थे। अभी फोन पर मम्मी से बात कर अंजली मशीन से कपड़े निकाल फैलाने आई कि बाबूजी ने चाय की मांग कर दी। इससे अंजली और झल्ला गई थी। बालकनी से मिसेज भल्ला उसको देखते ही बोलीं क्या बात है अंजली क्यों बडबडा रही हो? कुछ नहीं भाभी,वो पापा जी ,दिन भर कुछ न कुछ उन्हें चाहिए । मम्मी जी के गुजरे 2 साल हो गए।अब उनको समझना चाहिए कि कुछ मांगें कम कर दें,मुझे भी बहुत काम होता है ,इनकी फरमाइशें ही पूरा करती रहूं क्या? काम निपटा कर  मेरे घर आना ,मिसेज भल्ला बोली ,मैं तुम्हें इस परेशानी से बचने का रास्ता बताऊंगी। सच भाभी_अंजली खुशी से उछल गई । लेकिन भाभी आज तो सब घर पर हैं,कल आऊंगी ,दुखी होते हुए अंजली ने कहा। कोई बात नहीं  कल आ जाना ,कल 12 बजे से हमारे घर किटी हैं,महिलाएं आएंगी उनसे भी तुम्हारा परिचय करवा दूंगी। मिसेज भल्ला,एक आकर्षक व्यक्तित्व की मालकिन ,छोटे छोटे बाल जिसपर हाईलाइटर से रंग दिया...