तुम लौट आना

भूली हो इन गलियों को !!
याद आ जाए तो एक बार आ जाना,,
हम ठहरें है उन्हीं पलों में,,तेरे लौट आने की खातिर हो सके तो लौट आना,,
नमक सी दारुण हो गई जिंदगी हो सके
तो  चुटकी  भर थोड़ा  सा आटा ले आना,,

ये भी न हो सके मुमकिन तो
कुछ पलों के लिए
ही सही तुम लौट आना,,

हम आज भी उन्हीं 
यादों में बैठे है तुम आते वक्त यादों का पिटारा ले आना,, ए मेरें हमरूह तुम लौट आना,, अब मुमकिन नहीं तेरे बगैर सांस लेना भी, तुम अपनी आहट ले आना,,
निवेदन करते है आते वक्त थोड़ी लबों पर
मुस्कराहट  ले आना,,ये  सब  हो  या ना हो तुम लौट आना ।।

                                   ® "कुमार"

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