वह पाषाण नहीं , उनके अंदर भी दिल है, उनके दिलों में भी गम है , आंखें उनकी भी नम है। देखो जरा वह पिता है, देखो जरा वह पिता के रूप में भगवान ही तो हैं। बचपन में तुम्हारे जरा सी , रोने से जिनका सीना छल्ली छल्ली, हो जाता था, आज उन्हें रोने की हजार वजह दे दिया करते हो। तुम्हें काबिल बनाने के खातिर, पिता दिन रात मेहनत करते थें, तुम्हारी हर एक ख्वाहिशें पूरी करने के खातिर ,ना जाने वह कितनी रातें बिना आराम किये गुजार दिया करते थें । बचपन में कहा करते थे, बड़ा होकर कमाकर खिलाऊंगा, बस एक बार, बस एक बार, इन बातों को दोहराकर तो देखो। बेशक मत उठाना जिम्मेदारियां उनकी बेशक मत उठाना जिम्मेदारियां उनकी उन्हें किस चीज की जरूरत है, ये पूछ कर तो देखो। उनके हिस्से का भी खाकर पले बढ़े हो बस एक निवाला ,बस एक निवाला अपने हिस्से का खिलाकर तो देखो। वह कांटे नहीं जो चुभने लगे हैं , आज भी फूलों की पंखुड़ियों की भांति तुम्हारे पथ पर पड़े हैं। देखो जरा वह पिता हैं, ...
जीवन में पल पल आती है चुनौतियां। जाने कहां से बाढ़ सी आती चुनौतियां। बेशक जीवन में खुशी भी है पर अधिक चुनौतियां। निबटते चलो फिर नई नई आती चुनौतियां। बालक से वृद्ध सबसे सामना होती चुनौतियां। कहते हैं जीवन में रंग भरती चुनौतियां। हमें अनुभवी और जुझारू बनाती चुनौतियां। कभी उलझन में डाल देती चुनौतियां। पीछा छुड़ा नहीं सकते होती ऐसी चुनौतियां। -चेतना सिंह,पूर्वी चंपारण
सनातन धर्म की रक्षक। भोलेनाथ की भक्त अहिल्या बाई शत् शत् नमन।। किया धर्म हित अथक प्रयास शत् शत् नमन। जन जन की सेवा मे रत हर शत् शत् नमन।। न्याय किया अपराधी को दण्ड दिया शत् शत् नमन। है ऋणी राष्ट्र आपका शत् शत् नमन।। मालवा की माटी काममान बढ़ाया शत् शत् नमन। आशा की कामना यश कीर्ति गाएँ हम शत् शत् नमन।। स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर
Comments
Post a Comment