वह पाषाण नहीं , उनके अंदर भी दिल है, उनके दिलों में भी गम है , आंखें उनकी भी नम है। देखो जरा वह पिता है, देखो जरा वह पिता के रूप में भगवान ही तो हैं। बचपन में तुम्हारे जरा सी , रोने से जिनका सीना छल्ली छल्ली, हो जाता था, आज उन्हें रोने की हजार वजह दे दिया करते हो। तुम्हें काबिल बनाने के खातिर, पिता दिन रात मेहनत करते थें, तुम्हारी हर एक ख्वाहिशें पूरी करने के खातिर ,ना जाने वह कितनी रातें बिना आराम किये गुजार दिया करते थें । बचपन में कहा करते थे, बड़ा होकर कमाकर खिलाऊंगा, बस एक बार, बस एक बार, इन बातों को दोहराकर तो देखो। बेशक मत उठाना जिम्मेदारियां उनकी बेशक मत उठाना जिम्मेदारियां उनकी उन्हें किस चीज की जरूरत है, ये पूछ कर तो देखो। उनके हिस्से का भी खाकर पले बढ़े हो बस एक निवाला ,बस एक निवाला अपने हिस्से का खिलाकर तो देखो। वह कांटे नहीं जो चुभने लगे हैं , आज भी फूलों की पंखुड़ियों की भांति तुम्हारे पथ पर पड़े हैं। देखो जरा वह पिता हैं, ...
सनातन धर्म की रक्षक। भोलेनाथ की भक्त अहिल्या बाई शत् शत् नमन।। किया धर्म हित अथक प्रयास शत् शत् नमन। जन जन की सेवा मे रत हर शत् शत् नमन।। न्याय किया अपराधी को दण्ड दिया शत् शत् नमन। है ऋणी राष्ट्र आपका शत् शत् नमन।। मालवा की माटी काममान बढ़ाया शत् शत् नमन। आशा की कामना यश कीर्ति गाएँ हम शत् शत् नमन।। स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर
.....जब मैं दसवीं में पढ़ता था ,तो घर के सभी लोग मेरे पीछे पड़े रहते थे। उनकी कोई गलती नहीं थी ,यह बात मैं आज कह सकता हूं ।आखिर मैं पढ़ाई पर बिल्कुल जो नहीं ध्यान देता था। मैं मध्यमवर्गीय परिवार से था, चार भाई बहनों में मैं तीसरे नंबर पर था। मेरी तीनों बहनें पढ़ाई में अच्छी थी। मैं एक तो अकेला लड़का..... ऊपर से लड़के लड़की का भेद करने वाला हमारा समाज ........इसलिए मम्मी पापा और तीनों बहनें मुझे पढ़ाई पर एकाग्र चित्त करने के लिए कभी प्यार से समझाते , कभी डांटते और कभी कभी पिटाई भी लगाते थे ।लेकिन मजाल जो कभी कोई हथियार मेरे काम आया हो। मैं तो बस मस्त मौला अपनी धुन में रहता , कभी छत पर पतंग उड़ाता, कभी दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलता, कभी कैरम खेलता और कभी-कभी मां के साथ रसोई में सब्जी बनाने में मदद करता । सब्जी की रेसिपी जानने और वैसे ही सब्जी बनाने में मुझे बड़ा मजा आता था। लेकिन जैसे ही बात गणित, भौतिक शास्त्र ,रसायन शास्त्र और अंग्रेजी की होती तो मेरा दिमाग सुलगने लगता। हमारे घर में मम्मी ने बर्तन मांजने के लिए एक कामवाली को रखा हुआ था...
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