"नशा छीन लेता है हर सुख"



जीवन बहुत सुंदर होता गर नशा नहीं करते तुम।
मृत्यु तो निश्चित है लेकिन दर्द में नहीं जीते तुम।।

धूम्रपान को छोड़ दो अब भी नहीं हुई है देर।
मत करो सीने को छलनी अपने तन से बैर।

तंबाकू, सिगरेट, शराब अपनों से करता दूर है।
जो करता नशा कष्ट पूर्ण जीवन जीने को मजबूर है।

नशा के हर पदार्थ पर लिखा हुआ स्पष्ट है।।
इसके सेवन में है मृत्यु जीवन में सिर्फ कष्ट है।।

जानबूझ कर फिर क्यों देते हो खुद को कष्ट।।
गुटखा मुख में डालकर क्यों करते खुद को भ्रष्ट।

नशा छीन लेता है फिर जीवन का हर सुख।
सोच, समझ क्षमता को हर दामन में भरता दुख।

मित्रों के संग बैठकर बनते आप नवाब।
खाते और खिलाते हैं दारू ओर कबाब।।

तन जर्जर कर देता है बुद्धि लेता छीन ।
सुख समृद्धि को छीन कर कर देता है दिन।

परिवार को ध्यान रख ले लो यह संकल्प।
छोड़ दोगे नशा को  बचे ना कोई विकल्प।।"
   अम्बिका झा ✍️

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