संस्कार


अपने बुजुर्गो का जो करता सम्मान
जग में उसका होता बंधु बड़ा नाम 

 नींव का एक एक पत्थर जिसने लगाया
अपने प्रेम से परिश्रम से घर को घर बनाया 

अनादर करना उसका होगा नहीं कल्याण
अपने सर पर सदा महसूस करो आशीर्वाद 

माता पिता का कर्ज़ उतार सकते नहीं 
सेवा करो दिन रात यहीं जीवन आधार 

आज करोगे तो कल मजबूत होगा 
आने वाली पीढ़ी का बच्चा संस्कारवान होगा

© रेणु सिंह "राधे " ✍️

Comments

Popular posts from this blog

आज की मांग

आखिरी अदालत

सुनहरी यादें