भगवान परशुराम

ऋषि जमदग्नि की कुटिया में बजी बधाई
धन्य भाग्य नारायण की नजर उतारे  रेणुका माई

सुशोभित है भृगु वंश के कुलदीपक बन
 स्वस्ति वाचन करें सब ऋषि गण
दश दिगपाल स्वागत में खड़े हैं
चौंसठ योगिनी गाए मंगल गान
छठे अवतार हैं नारायण के धरा पर
देख बाल रूप में अति मन भाए
ॠषि.................

एक हस्त में शास्त्र को धारा
दूजे हस्त में शस्त्र संभाला
शस्त्र,शास्त्र की दीक्षा लेकर
शिव धनुष  परशु धारण कर
परशुराम कहलाए !
ॠषि.............
 
धरकर रूप काल भैरव का
जब बाह्मण ने हुंकार भरा
धर्म की रक्षा के खातिर
सहस्त्रबाहु  का संहार करा
त्रेता युग से द्वापर युग तक
राम कृष्ण का साथ निभाए !
ॠषि..............

स्वरचित : पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार

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