कहाँ ढूँढूँ

एक बेटे का खत माँ के नाम                               

कल था तेरी कोख में
फिर कलेजे लगा और पका तेरी गोद में
बचपन मे दुलारा और प्यार दिया।
शादी का मुझे आशीर्वाद दिया।
अंतिम समय पर सिर्फ एक बार पूछा। 
कहाँ है बेटा।
पर तूने न इंतजार किया। 
भूल गई तु मुझे बिना मिले चली गई।। 
हमने भी तो तुझे मिटाने के लिए।
चिता पर लिटा दिया जलाने के लिए।।
अस्थियाँ भी विसर्जित कर दीं।
और मिटा दिया तेरे निशां को।
पर याद आती है तो सोचता हूँ मै।
ढूँढूँ कहाँ अब तुमको माँ।।

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