" बीता हुआ कल "



बीता हुआ कल,
चाहे हो सुख के या दुख के
वापस नहीं आते
रह जाती हैं बस उनकी यादें...

बीते हुए कल में,
याद जो आती है बातें
सोचते ही मन में
एक अलग सी मुस्कान है, आती...

जीवन के इस दौर में,
सुख-दुख के कितने
पल है आते
उन पलों को लेकर
आज हम इस मोड़ तक है आते..

जीवन का यह चक्र
निरंतर जीवन में है चलता
बीते हुए कल को याद ना करके
जिओ जी भर के, आज का दिन
हर पल एक अलग
अनुभूति है होती
जो हमें जीवन जीना है सिखाती....

मंजू रात्रे ( कर्नाटक )

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