गज़ल


एक चेहरा जो मेरे दिल को खिला देता है।
मुझे हर रोज़ खुश रहने की वजह देता है।।

वो मेरा कौन है मालूम नहीं है लेकिन।
जब भी मिलता है सिजदे में जगह देता है।।

मैं कभी टूटकर अंदर से बिखर जाऊं तो।
वो मुझे थाम कर पहलू में सुला लेता है।।

जब कभी तन्हाई में चुपके से रोना चाहूं।
दिल के दरवाजे पे धीरे से सदा देता है।।

उसकी आंखों में रब जाने, कैसा जादू है।
बस एक ही पल में दुनियां को भुला देता है।।
डॉ0 अजीत खरे

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