सुखद स्मृतियां



किसी भी सुखद स्मृति में,
खुश्बू ही होती है।
सुखद स्मृतियां कभी तस्वीरों में,
तो कभी दिल में कैद होती है।
खयाल आते ही,
आंखों में एक चमक होती है।
खयाल आते ही,
होंठों पर एक मुस्कान होती है।
कोई अनाड़ी ही पूछता है,
कि अकेले क्यों मुस्करा रहे हो।
सयाने को पता है,
क्यों दमक ठहरा रहे हो।
सुखद अनुभूतियों को,
क्यों अतीत ही रहने दें।
वर्तमान में याद कर,
खुशियां प्रतीत भी होने दें।
रब करे सबके जीवन में,
सुखद स्मृतियों का संग्रह हो।
जीवन का मान रखने को,
दुख हो पर कम,ये अनुग्रह हो।
      -चेतना सिंह,पूर्वी चंपारण

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