छुट्टी की सुबह



बहुत ही आरामदेह होती।
बहुत ही खुशनुमा होती।
मीठे आलस से भरी होती।
भागमभाग से मुक्त होती।
बिस्तर की गोद भरी होती।
प्यारी प्यारी उबासी होती।
देह पर हल्की पोशाकें होती।
इत्मीनान से चाय की चुस्की होती।
हटके भोजन में स्वाद बसी होती।
मित्र यारों से मुलाकातें होती।
हाट बाजारों की चक्करें लगती।
होठों पर एक मुस्कान होती।
स्थायी छुट्टी ना करे रब किसी की।
बस हर हफ्ते छुट्टी रहे किसी की।
               -चेतना सिंह,पूर्वी चंपारण

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