हर तस्वीर कुछ कहती है

हर तस्वीर कुछ कहती है

आप ने तस्वीर भेजी मैं ने देखी ग़ौर से 

हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं 

रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया 

अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया


ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले 

मैं अभी तक तेरी तस्वीर लिए बैठा हूँ 

अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे 

मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले 

मुझ को अक्सर उदास करती है 

एक तस्वीर मुस्कुराती हुई 

चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़ 

तस्वीर-ए-यार को है मिरी गुफ़्तुगू पसंद 

भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर 'शकील' 

आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए 
रंजना झा

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