देवी भजन


सुमिरन करके नारायन को औ सारद के चरन मनाय।
सुमिरों काली कलकत्ते की जो असमय में होय सहाय।।
हात जोर बिनती मोरी माता महामारी  करो बंटाढार।
जनता सुखी होय गुन गाबे निशदिन तोरे जगदाधार।।
रकतबीज सी जा बीमारी ईको करौ समूल बिनास।
खप्पर धरो महामाई मोरी तोसें इतनी है अरदास।।
अरजी मोरी मरजी तोरी मईया अब तो मोहिं उबार।
घर परवार सबई तोरो है रच्छा सबकी कारन हार।।
बेगि हरौ अब दुख भवानी तोरो नाम जपौं दिनरात।
हात पकर लेव अब तौ मईया कबहुँ न तुमरो छूटै साथ।।
आसा की बिनती है माता भारत खाँ अब लेव बचाय।
सबके सुख खाँ तुमईं बढा़ने जासों सब रहबें हरषाय।।
स्वरचित प्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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