जय श्रीराम
चैत्र नवरात्रि तिथि नवमी और काल मध्याह्न
धन्य हुई गोदी कौशल्या की,
सूर्यवंशी राजा दशरथ के घर जब जन्मे राम
पवित्र हुई भारत भूमि, हुआ परम प्रतापी अयोध्या धाम..
भरत-शत्रुघ्न, लक्ष्मण के अग्रज सबके राजदुलारे राम..
मध्यान्ह के सूर्य की भांति संयम की परिभाषा राम
लक्ष्मी स्वरूपा सीता के पति, पुरुषों में सर्वोत्तम राम
अति विनीत वीर रघुनन्दन परम तपस्वी धीर रघुनन्दन
मंगलमूर्ति बजरंगी के प्रभु मंगल सदा करते श्रीराम
धरतीधर के स्वामी प्रभु, हमारे राजा-नारायण अवतारी राम
कण कण में राम, जन जन में राम
हर मुख में राम, हर मन में राम
दो आक्षरी इक सुंदर नाम..
बिगड़े बनाए सारे काम.. निर्मल मन से जपें जो राम।।
रामनवमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ
स्वरचित- शालिनी अग्रवाल
जलंधर
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