जलियावाला बाग हत्याकांड




यह अप्रैल है लथपथ खूनों से,
   जलियावाला बाग नरसंहार की...
एक नहीं हजारों माशुमों की,
   बलि चढ़ि थी जान की...
यह अप्रैल है......

आज बैसाखी के दिन 13 थी,
   अमृतसर की पावन भूमि सजी...
खुशियों अमन की मेला लगी थी,
   हजारों लोगों की भीड़ जुटी...
यह अप्रैल है......

एक क्रूर आदेश था जनरल डायर की,
   निहत्थे लोगों पर गोली चलवा दी...
बच्चे,बूढ़े,माताओं को,
   बेघर,बेवजह मरवा दी...
यह अप्रैल है......

एक कवि थे रविन्द्र नाथ जी,
   जिनको इस घटना की घात लगी...
ब्रिटिश उपाधि "सर" का ताज़,
   उन्होंने अंग्रेजों को फौरन लौटादी...
यह अप्रैल है......

मैं सभी शहीदों को नमन करता हूँ,
   जिन्होंने अपनी प्राण गवाये थे...
यह दिन अंग्रेजों की है 'काला' चिट्ठा,
   सबको याद दिलाने थे...
यह अप्रैल है......


   ✍️विकास कुमार लाभ
           मधुबनी(बिहार)

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