ध्रुवतारा



ध्रुवतारा सा बनकर चमकुं
मैं सारे आसमानी सितारों में,
अलग ही पहचान बने मेरी,
जैसे महके फूल बहारों में।

बीड़ बड़ी है दुनिया में यूँ तो,
पर अलग बनूँ मैं हज़ारों में,
बुराइयों से दूर रहूँ सदा बस,
निर्मल बनूँ सब सितारों में।


पूजा पीहू

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