यादें


माना हो गई कुछ धुंधली हैं
तुम्हारी कितनी यादें आज भी,
जहन से मेरे लिपटी हैं।

  वो खामोशियों के साए में,
नजरों के  दरमियाँ जो हुई,
उन यादों की खुशबुएं आज भी बिखरी हैं।

मैंने सोचा था काफी अर्सा हुआ,
भूल गए न उनका चर्चा हुआ,
जब भी हुए तन्हा बनके चाँदनी  वो छिटकी हैं।

जब भी किसी ने तन्हां छोड़ा,
जब भी किसी ने दिल तोड़ा,
तेरी यादों की परछाइयां निखरी हैं।

शायद मिलता प्यार तो देते सब भुला
अफसोस तेरे जैसा कोई मिल न सका,
आज भी वो ख्वाहिश  दबी दबी है।

मुझे मालूम हैअब यादों का कोई अर्थ नही,
इस सुलूक की दुनिया में उनकी  कोई जगह नही,
फिर भी यादें कब परवाह कोई करती हैं।

कितना याद आते हैं वो मासूम लम्हें,
मोहब्बत के शहर में कदम थे पड़े,
वो यादें आज भी वेपनाह मचलती हैं।

बस यादें करके हवा का कभी रुख,
हिला देतीं है मन के वियावान को,
जानते हैं सभी यादों से कहां जिन्दगी कटती है।
अन्जू दीक्षित
उत्तर प्रदेश।

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