वो अनकहा सा क्या


अनदेखा,अनजाना, अनकहा,
न किसी ने देखा न सुना,
फिर भी सबके दिलों में बसा, 
बनके सरगम  बज उठा।

जिसके बिन जिन्दगी बेमानी है,
जिससे बनती हकीकत, और कहानी है,
कभी शरमाया, कभी गले से लगा।

बहुत मासूम सा बहुत नादान है,
कभी बे बजह हंसे कभी परेशान है,
कभी फजाओं में रोशन, कभी छुपा छुपा।

कभी काजल लगी पलकों में रुका,
कभी लाली सजे होठों में मिला,
है अजब ही इश्क का सिलसिला।


न कोई भाषा,न मौन है,अलग ही इसकी धुन है,
सबसे कीमती सबसे लाजबाब है,
कभी हकीकत कभी ख़्वाब है वो क्या बताओ जरा।


इश्कहै, प्यार है ,प्रेम है प्रीत है,
सबसे अनोखा इसका गीत है,
सुबह सा चंचल , कभी शामों सा दिलकश शमाँ।

बस महसूस करने का नाम है,
आशिकों को पता इसकी पहचान है,
  जख्मों का है मरहम,होंठो की दुआ।

अन्जू दीक्षित,
उत्तर प्रदेश।

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