मुट्ठी में तंत्र


तन हमारा रहे स्वस्थ,
समझो इसको जरा सब ,
पकड़े रहो हरी सब्जियों का साथ, 
तो यकृत रहेगा हरा-भरा।
खाओ चुकुंदर गाजर,
तो ऑंखें होंगी चमकीली।
जाओ घूमने बगीचे में,
खाओ हवा ताज़ी,
तो फेफड़ों को मिलेगी,
प्राण वायु और होंगे वो पुष्ट भी।
मिलो यारों दोस्तों से,
करो हॅंसी-ठिठोली,
तो दिल खुश हो जाएगा ,
नहीं पड़ेगा औज़ारों से वास्ता।
जब रखेंगे हम ध्यान अपना,
और अपने शरीर का तो, चलेंगे सभी तंत्र ,
पकड़े रहेंगे हमारा तन,
और होगा स्वस्थ मन,

©मनीषा अग्रवाल
इंदौर मध्यप्रदेश

Comments

Popular posts from this blog

आखिरी अदालत

आज की मांग

आवारा बादल (भाग 30) प्रयास