तेरी बिंदिया


मेंहदी, काजल, बिंदिया क्यों लगाकर आई हो
मेरा कत्ल करने या किसी का करने आई हो
बे हिसाब नशा ही नशा है तेरे अंग अंग में
पीकर आई हो या शराब से नहाकर आई हो


तेरे नाम की बिंदी लगाकर जब सज जाती हूँ
जब तुझे दिखाने सामने आती हूँ
तुम चाहे जितना रहो मुझसे दूर दूर
मैं तुझे हमेशा अपने करीब पाती हूँ


तेरे माथे पर लगे हैं जैसे चांद तारा
जिया मे चमके कभी कभी अंगारा
ठुमक ठुमक  चले जब तू मेरा नस  नस खनके 
भटकते है तेरे नैना, मैं कुछ नख बोलू
रंजना झा

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