सावित्रीबाई फूले



बताकर के विधा को सर्वश्रेष्ठ धन
विधा का सृष्टि में प्रचार कराया है
पढ़ाई के विरोधियों को हराकर
दलितों को भी सम्मान दिलाया है

छोटी मानसिकता रखने वालों को भी
सम जाति का ज्ञान कराया है
जो समझते थे दलितों को छोटा
उनकी मानसिकता का हनन कराया है

बनकर के भारत की प्रथम शिक्षिका
शिक्षण संस्थानों का भी निर्माण कराया है
बनकर के समाज की सेविका
शिक्षा का विकास कराया है

थी मराठी काव्य की कवयित्री
कविताओं का सौंदर्य बढ़ाया है
लिख कर के "फूलें" काव्य को
पुस्तक का प्रचार कराया है

महिलाओं को भी शिक्षा दिलाने को
1848 में विधालय बनवाया है
थी जितनी लड़कियों के लिए पाबंदी
सभी पाबंदियों का हनन कराया है

कीचड़ और पत्थर फेंक कर रोका गया उनको
फिर भी स्त्री शिक्षा की ज्योत को जलाया है
न हटी डर कर के अपने कर्तव्यों से
पति ने भी उनके कार्यो में उनका साथ निभाया है

सावित्री और ज्योतिबा के निरंतर प्रयासों से
18 कन्या विधालयों का निर्माण कराया है
ग्रहण करके उच्च शिक्षा को
खुद को फूल सा खिलाया है
       "स्वेता मिश्रा "

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