दुल्हन और उसके मन की भावनाएं
आज बैठी हूं सपने संजोने।
आज बैठी हूं सपने संजोने।
वहां सब कैसा और क्या क्या होगा।
आज बैठी हूं सपने संजोने।
वहां सब कैसा और क्या-क्या होगा।
तितली सी उड़ती है मन में यह सोचकर।
तितली सी उड़ती है मन में यह सोचकर।
कि अब तो पिया जी के घर जाना ही होगा।
वही आंखें भी भर आती हैं यह सोचकर।
वही आंखें भी भर आती है यह सोचकर।
कि अब तो बाबा के घर से जाना ही होगा।
क्या कहकर बुलाऊंगी पिया जी को, यह सोचकर भी तो जाना होगा।
बचपना छोड़ना है आज से मुझको,
बचपना छोड़ना है आज से मुझको,
ये भी तो दिल और दिमाग को समझाना होगा।
वैसे तो है वहां सब अच्छे,
वैसे तो है वहां सब अच्छे,
पर कभी कोई कुछ कह भी दे, तो दिल से नहीं लगाना होगा।
अब तो सास- ससुर ही है मम्मी पापा,
ये भी तो दिल को समझाना होगा।
जो हो जाए कभी कोई खटपट ससुराल में,
जो हो जाए कभी कोई खटपट ससुराल में,
तो मायके को बीच में ना लाना होगा।
अच्छी बहू बनकर,अपने मायके की इज्जत को बढ़ाना होगा।
आज बैठी हूं सपने संजोने,
कि ससुराल में सब कैसा और क्या-क्या होगा।
नीति अनेजा पसरिचा
रूद्रपुर,उत्तराखंड
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